प्रदेश सरकार की मंशा पर नहर विभाग के अधिकारी पानी फेर रहे हैं। विभाग की उदासीनता के चलते नहरों में धूल उड़ रही है। नहरों में पानी नहीं आने से फसलें सूख रही हैं। किसान गोष्ठी में डीएम ने पांच मई तक नहरों में छोड़े जाने का आश्वासन दिया था। बावजूद इसके अभी तक नहरें सूखी पड़ी हैं।
प्रदेश सरकार ने किसानों के हित को देखते हुए नहरों व नलकूपों से की जाने वाली फसलों की सिंचाई पूरी तरह मुफ्त की हैं। सरकार का दावा नहर विभाग पर पूरी तरह लागू होता नजर नहीं आ रहा है। बीते दो माह से क्षेत्र की किसी भी नहर में पानी नहीं आया, नहरें सूखी पड़ी हैं। किसानों ने किसी तरह खेतों की भराई कर उसमें उर्द, मूंग आदि की बुआई कर दी हैं लेकिन नहरों में पानी न आने के कारण किसानों की फसलें सूख रही हैं।
किसान नेता प्रमोद मिश्र ने बताया कि नहरों में पानी दो माह से नहीं आया है। 18 अप्रैल को कलेक्ट्रेट में आयोजित किसान गोष्ठी में डीएम से नहरों में पानी छोड़े जाने की बात कऱ्ी गई थी। डीएम ने आश्वयन दिया था कि नहरों की सफाई कराकर पांच मई तक नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा लेकिन अभी तक नहरें सूखी हैं।
रायपुर फुलवारी के किसान सुनील उर्फ दवाईलाल पांडेय ने बताया कि नहरों में पानी न आने के कारण उर्द, मूंग, चरी आदि की फसलें सूख रही हैं। कुशीताली के किसान ओमप्रकाश ने बताया कि नहर में पानी न आने के कारण उनकी दो बीघा उर्द की फसल सूख चुकी है। पूरे नरपत गांव निवासी गुंजन पांडेय का कहना है कि नहर में पानी न आने से जहां फसलें सूख रही हैं वहीं धान की नर्सरी के लिए भी खेत तैयार नहीं हो पा रहा है।
बारामासी निवासी किसान नेता धर्मेंद्र शुक्ल ने बताया कि हमारे यहां करीब 20 बीघा उर्द, मूंग आदि की फसलें सूखने के कगार पर हैं। लोगों ने कहा कि यदि दो चार दिन में पानी नहीं आया तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे ।