शासन है और प्रशासन भी, सांसद और विधायक भी हैं पर, अलीपुर ग्राम सभा के हरीपुर में बालमपुर ड्रेन पर बने मौत के पुल पर किसी की निगाह नहीं पड़ी। रोजाना स्कूली बच्चे इसी खतरनाक पुल से जिंदगी संवारने की राह तय करते हैं जबकि सैकड़ों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की यह एकमात्र डगर है।
यह पुल लगभग चार साल पहले टूूट गया था। तब से आज तक इस पुल के निर्माण को लेकर कोई भी आगे नहीं आया। ग्रामीणों ने टूटे पुल को लेकर सभी जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन उन्हें महज कोरा आश्वासन मिला। परेशान ग्रामीण पुल के नीचे बल्ली लगाकर इस पर आवागमन कर रहे हैं।
भदैंया विकास खंड के अलीपुर ग्राम सभा में हरीपुर पुरवे से बालमपुर ड्रेन निकली हुई है। इस रास्ते से क्षेत्र के हड़हा, भरसारे, भगवानपुर, रूदौली, पलिया, मधुकरिया, सकरसी, ज्ञानीपुर, कन्हईपुर, बोखारेपुर, पतीपुर, अमारी, बजेठी, बाबूगंज, मीरानपुर, बेलसौना तथा पड़ोसी जनपद के रामगंज, दुर्गापुर समेत लगभग तीन दर्जन से अधिक गांव के लोग रोजाना आवागमन करते हैं। 1990 में आस-पास के ग्रामीणों के सहयोग से बालमपुर ड्रेन पर पुल का निर्माण कराया गया था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक इस ड्रेन को पहले पीली नदी के नाम से जाना जाता था। चार वर्ष पूर्व यह पुल टूट गया था। ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत के लिए सभी जनप्रितिनिधियों से गुहार की लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला। स्थानीय लोगों ने चंदा जुटाकर बल्ली पटरे की व्यवस्था की। जनसहयोग से लकड़ी का पुल आवागमन के विकल्प के रूप में तैयार किया गया। सबसे खराब स्थिति बरसात के मौसम में रहती है। बल्ली के ऊपर डाली गई मिट्टी से फिसलने के बाद नीचे बह रहे पानी में गिरने का खतरा बना रहता है।