सुल्तानपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा सांसद मेनका गांधी के संसदीय क्षेत्र में जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। चुनावी रणक्षेत्र में भाजपा सिर्फ तीन सीटों पर सिमट गई। सत्तासीन भाजपा के मुकाबले सपा, कांग्रेस व बसपा के साथ निर्दलीयों ने अपना वर्चस्व कायम रखा है। नतीजों के बाद भाजपा सकते में आ गई है।
त्रिस्तरीय पंचायत के जिला पंचायत सदस्य चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी की ओर से सभी 45 सीटों पर उतारे गए 42 प्रत्याशी चुनाव हार गए हैं।
पार्टी को सिर्फ तीन सीटों पर विजय मिल सकी है। इसमें वार्ड संख्या नौ से मधु उपाध्याय, वार्ड 25 से निवर्तमान अध्यक्ष ऊषा सिंह व वार्ड संख्या 27 से बीजेपी समर्थित प्रत्याशी बद्रीप्रसाद यादव ही जीत हासिल कर पाए हैं। 42 सीटों पर हार से पार्टी सकते में आ गई है।
यहां तक कि पार्टी के कई धुरंधरों को वोटरों ने जमीन दिखा दी है। निर्वाचन में काशी क्षेत्र की निवर्तमान क्षेत्रीय मंत्री व अध्यक्ष पद की दावेदार बबिता तिवारी को हार का सामना करना पड़ा है।
जिला उपाध्यक्ष संजय सिंह त्रिलोकचंदी की पत्नी विजय कुमारी, पूर्व महामंत्री कृपाशंकर मिश्र की पत्नी आशा मिश्रा, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के करीबी हिंदेश की पत्नी प्रियंका सिंह, सांसद वरुण गांधी के प्रतिनिधि रहे संदीप मिश्र, निवर्तमान ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि विनोद मिश्र समेत कई अन्य भाजपाइयों को चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है।
चुनाव के पहले भाजपा 35 प्लस की योजना बनाकर मैदान में उतरी थी। आए नतीजों से पार्टी के अरमानों पर पानी फिर गया है। पार्टी की हार के पीछे प्रत्याशियों के चयन में गड़बड़ी बताई जा रही है। पंचायत चुनाव में सत्तासीन भाजपा के मुकाबले सपा ने सात, बसपा ने पांच, कांग्रेस तीन, आप दो व अन्य समेत निर्दलीयों ने 25 सीट पर फतह कर बीजेपी को आईना दिखाया है। नतीजों की घोषणा के बाद सत्तासीन भाजपा सकते में आ गई है। उसका अपना अध्यक्ष बनाने का ताना-बाना गड़बड़ होता नजर आ रहा है।