सुल्तानपुर। जन्म या मृत्यु के दो साल से अधिक समय बाद प्रमाणपत्र बनवाना अब आसान नहीं होगा। ऐसे मामलों में अब एसडीएम के आदेश से काम नहीं चलेगा। प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026 के तहत बदली गई व्यवस्था एक अक्तूबर से लागू हो गई है।
नई व्यवस्था का असर उन लोगों पर पड़ेगा, जिन्होंने जन्म या मृत्यु का पंजीकरण समय पर नहीं कराया और वर्षों बाद प्रमाणपत्र बनवाना चाहते हैं। ऐसे आवेदकों को अब न्यायालय की प्रक्रिया से गुजरना होगा। केवल कार्यपालक मजिस्ट्रेट यानी एसडीएम की अनुमति के आधार पर दो साल से अधिक पुराने मामलों में प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकेगा।
एसडीएम के अधिकार भी हुए सीमित
30 सितंबर तक लागू व्यवस्था में एक साल से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों में आवेदक एसडीएम के यहां आवेदन करते थे। जांच-पड़ताल के बाद एसडीएम अनुमति देते थे और इसके आधार पर नगर पालिका प्रमाणपत्र जारी करती थी। एक साल तक की देरी वाले मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्थानीय निकाय स्तर से ही प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता था। अब संशोधित नियमों के तहत एसडीएम का अधिकार क्षेत्र एक से दो साल तक की देरी वाले मामलों तक सीमित कर दिया गया है। दो साल से अधिक पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश लेना जरूरी होगा, यानी जितनी अधिक देरी, प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया उतनी ही औपचारिक होगी। अन्य नियमों में बदलाव नहीं किया गया है।
विलंब शुल्क एवं आवश्यक कार्यवाही का विवरण
अवधि शुल्क आवश्यक कार्यवाही 21 दिन के भीतर निशुल्क सामान्य पंजीकरण
21 दिन से अधिक व 30 दिन तक 20 रुपये रजिस्ट्रार द्वारा पंजीकरण
30 दिन से अधिक व 1 वर्ष तक 50 रुपये सक्षम अधिकारी की अनुमति
1 से 2 वर्ष तक 100 रुपये अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट
2 वर्ष से अधिक 100 रुपये और अन्य शुल्क प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
पालिका से जारी हुए प्रमाणपत्र
नगर पालिका परिषद सुल्तानपुर में जनवरी 2026 से सितंबर 2026 तक 1654 जन्म सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनके सापेक्ष जांच के बाद 1325 जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। वहीं इस समयावधि में 175 मृत्यु की सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनमें से 112 के प्रमाणपत्र जारी हुए।
दो वर्ष से अधिक पुराने प्रमाणपत्रों के मामले में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य हो गया है। किसी भी जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिन के भीतर देना अनिवार्य है। इससे अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं और शुल्क से बचा जा सके।
- लालचंद्र सरोज, ईओ, नगर पालिका परिषद