जिला पंचायत में चतुर्थ राज्य वित्त आयोग का बजट मिले बिना ही पांच करोड़ रुपये का टेंडर करा लिया गया। दो माह पहले कराए गए टेंडर में धरोहर धनराशि जमा कराने में भी अनियमितता बरती गई है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने टेंडर में शासनादेश का उल्लंघन एवं भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शिकायत प्रमुख सचिव पंचायतीराज से की है।
प्रकरण सामने आने पर जिला पंचायत में खलबली मची है। अप्रैल में जिला पंचायत की ओर से कराए गए 133 सड़कों के निर्माण के टेंडर में बड़ी अनियमितता बरते जाने के मामले का खुलासा हुआ है। प्रमुख सचिव पंचायतीराज को पूर्व जिला पंचायत सदस्य रतीपाल यादव द्वारा भेजी गई शिकायत में बड़ा आरोप लगा है।
पत्र के मुताबिक जिला पंचायत को चतुर्थ राज्य वित्त आयोग से करीब पांच करोड़ रुपये का बजट मंजूर हुआ है। बजट मिले बिना ही जिला पंचायत ने 133 मार्गों के निर्माण का टेंडर करा डाला। बजट की प्रत्याशा में कराए गए टेंडर को शासनादेश एवं निर्माण की गाइडलाइन के विपरीत बताया जा रहा है।
पूर्व जिला पंचायत के मुताबिक बिना बजट मिले टेंडर कराना शासनादेश का उल्लंघन है। जिला पंचायत में कराए गए टेंडर में जमा कराई गई धरोहर धनराशि, ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन, तुलनात्मक चार्ट में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। पूर्व जिपंस ने जिला पंचायत में कराए गए पांच करोड़ के टेंडर को नियम विरुद्ध बताते हुए प्रमुख सचिव पंचायतीराज से जांच कराने की मांग की।
वहीं, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राम निहोर का कहना है कि अभी चतुर्थ राज्य वित्त की धनराशि नहीं मिली है। कराए गए टेंडर के कार्य धनराशि मिलने के बाद होंगे। बताया कि बजट की प्रत्याशा में टेंडर करा सकते हैं।