मनरेगा कार्यों में अनियमितता और कार्ययोजना के डीपीआर से अधिक पेमेंट करना जामों के खंड विकास अधिकारी को भारी पड़ी। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप साबित होने के बाद बीडीओ को निलंबित करते हुए शासन से उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। शासन की कार्रवाई से अन्य विकास खंडों में तैनात बीडीओ में हड़कंप मचा है।
जामों के खंड विकास अधिकारी हरिशंकर गुप्ता के खिलाफ बीते दिनों जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ ही शासन में शिकायत हुई थी। शिकायतकर्ता ने बीडीओ पर मनरेगा योजनांतर्गत कराए गए कार्यों में व्यापक अनियमितता बरतने, कूटरचित अभिलेख के आधार पर पेमेंट करने, अल्पकालीन त्रुटिपूर्ण निविदा आमंत्रित कर उच्च दरों पर अनियमित रूप से सामग्री क्रय करने, श्रमिकों का कार्य और भुगतान ठेकेदारी प्रथा से कराने, उच्च गुणवत्ता की सामग्री का प्रयोग न किए जाने के साथ ही श्रमिकों की मौजूदगी के बिना फर्जी भुगतान कराने का आरोप लगाया गया था।
शिकायत मिलने के बाद शासन ने एक विशेष टीम का गठन कर मामले की जांच का आदेश दिया था। बीते दिनों जामों आई जांच टीम ने पाया कि बीडीओ के ऊपर लगाए गए सभी आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं। जांच करने गई टीम की रिपोर्ट मिलने के बाद शासन ने राज्यपाल से बीडीओ को निलंबित करने व उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुमति मांगी थी। राज्यपाल की अनुमति मिलने के बाद शासन ने सोमवार को बीडीओ को निलंबित कर दिया है।
शासन के आदेश पर सचिव रामबहादुर के हस्ताक्षर से जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से सीडीओ को भेजे गए आदेश में बीडीओ पर की गई कार्रवाई की जानकारी दी गई है। भेजे गए आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि में बीडीओ हरिशंकर गुप्ता कार्यालय संयुक्त विकास आयुक्त फैजाबाद के यहां संबद्ध रहेंगे।