बांदा-टांडा राष्ट्रीय राजमार्ग की गुणवत्ता ठीक न होने के कारण इसमें दरारें आने लगी हैं। तेज रफ्तार वाहन कभी भी दुर्घटनाग्रस्त हो सकते हैं। सड़क की गुणवत्ता को लेकर पिछले महीने गड़ौली गांव के पास ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया था। इसके बाद भी आज तक सड़क की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं आया। ग्रामीण मामले में आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं।
जिले में बांदा-टांडा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 232 तकरीबन 60 किलोमीटर लंबा है। कटका से लेकर अंबेडकरनगर तक सड़क का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों तरफ सफेद पट्टी लगाकर काम पूरा होना दर्शाया जा रहा है। इसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कटका से विरैता के बीच सड़क जगह-जगह धंस कर उसमें दरारें आ गईं हैं। बरसात से क्षेत्र के पीढ़ी, चांदपुर, भटमई, गड़ौली, विरैता, महमूदपुर आदि स्थानों पर सड़क के किनारे की मिट्टी बह गई है।
सड़क पर जगह-जगह दरार होने से उसमें पानी रुकना शुरू हो गया है। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सड़क बनने से वाहनों का आवागमन भी बढ़ गया है। सड़क की गुणवत्ता को लेकर पिछले माह गड़ौली गांव के पास ग्रामीणों ने जाम लगाकर प्रदर्शन किया था। सूचना पर तत्कालीन तहसीलदार महात्मा सिंह व एनएच से जुड़े उच्चाधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर गुणवत्ता में सुधार करने व नाली निर्माण का आश्वासन दिया था। बावजूद इसके आज तक सड़क की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ।