सुल्तानपुर। पराली नहीं जलाने का सरकारी आदेश हवाई साबित हो रहा है। रात में धड़ल्ले से खेतों में पराली जलाई जा रही है। इससे प्रदूषण का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों की सूचना के बाद भी प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
स्थानीय तहसील क्षेत्र के बखरा गांव में पिछले दो दिनों से लगातार शाम ढलते ही खेतों में पराली जलाई जा रही है। न्यायालय व सरकार की सख्ती के बाद भी लोग पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
क्षेत्र में चोरी चुपके किसान खेतों में ही पराली जलाकर सरकार के नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। न्यायालय के आदेश व बढ़ते प्रदूषण के कारण सरकार पराली जलाने को लेकर सख्त है। सरकार ने राजस्व विभाग को पराली जलाने वाले किसानों पर सख्ती के साथ जुर्माना लगाने व मुकदमा लिखाए जाने का प्रावधान किया है।
बावजूद इसके लेखपालों की निष्क्रियता से लोग पर्यावरण में जहर घोल रहे हैं। शाम व देर रात पराली जलाने से पूरे दिन धुंध छाई रहती है। वैसे तो इस बार एसएमएस लगी कंबाइन मशीनों से ही धान की फसलें काटने का आदेश था लेकिन तहसील प्रशासन की उदासीनता से कई पुरानी तकनीक की मशीनों से ही क्षेत्र में फसलों की कटाई की गई है।
इन कंबाइन मशीनों से निकली बड़ी पराली का निस्तारण किसानों के लिए सिर दर्द बना है। लोगों का कहना है कि खेतों से पराली उठाने में बहुत अधिक खर्च आ रहा है और पराली पड़ी रहने से खेतों में ट्रैक्टर से जुताई नहीं हो पा रही है, जिससे गेहूं की बुआई पिछड़ रही है। दो दिनों से बखरा में जलाई जा रही पराली की सूचना ग्रामीणों ने लेखपाल से लेकर एसडीएम तक को दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पराली जला कर पर्यावरण प्रदूषित करने के आरोप में क्षेत्रीय लेखपाल ने स्थानीय थाने में मुकदमा पंजीकृत कराया। पुलिस मुकदमा पंजीकृत कर मामले की जांच में जुटी है। स्थानीय थाना क्षेत्र के देवलपुर निवासी दिनेश ने सरकार के आदेश की अवहेलना करते हुए अपने खेत में पराली जला दिया। सूचना पर पहुंचे क्षेत्रीय लेखपाल विवेक कुमार पांडेय ने थाने में तहरीर दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।