सुल्तानपुर। निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कीमतों में बड़ा अंतर सामने आया है। थोक बाजार में 12 रुपये का आईवी सेट अस्पताल में 120 रुपये, 40 रुपये का यूरिन कैथेटर 250 रुपये और 20 रुपये का ब्लड सेट 220 रुपये में दिया जा रहा है। गठिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाले गोलिमुमैब इंजेक्शन की थोक कीमत आठ से 10 हजार रुपये बताई गई, जबकि अस्पताल में इसके करीब 28 हजार रुपये लिए जा रहे हैं।
शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने शहर के छह निजी अस्पतालों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कीमतों की पड़ताल की। इस दौरान कई उत्पादों के थोक भाव और अस्पतालों में बताई गई कीमतों में कई गुना का अंतर मिला। ग्लूकोज की 11 रुपये की बोतल की कीमत अस्पताल में 110 रुपये बताई गई। इसके बाद आठ से 10 रुपये की कैनुला 120 रुपये, 40 रुपये का यूरो बैग 260 रुपये और 45 रुपये का बच्चों का ड्रिप सेट 250 रुपये में उपलब्ध कराने की जानकारी मिली। वहीं, 18 से 20 रुपये की खाने की नली की कीमत 120 रुपये बताई गई।
इंजेक्शन की कीमतों में भी बड़ा अंतर
नॉर्मल चौराहे के पास स्थित अस्पताल में इंटासेप्ट इंजेक्शन की कीमत करीब 10 हजार रुपये बताई गई, जबकि इसकी थोक कीमत लगभग तीन हजार रुपये है। गंभीर लिवर रोगियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाले एल्बुमिन इंजेक्शन की कीमत में भी अंतर सामने आया।
एक साॅल्ट, कीमतें अलग-अलग
मेडिकल स्टोर संघ के अध्यक्ष सतीश सिंह ने बताया कि एक ही साल्ट वाली दवाओं की कीमत कंपनी और गुणवत्ता के आधार पर अलग हो सकती है। उनके मुताबिक छह से सात गुना का अंतर नहीं होना चाहिए। कोई भी दवा एमआरपी से अधिक कीमत पर नहीं बेची जा सकती।
मेडिकल एजेंसी संचालक आरके तिवारी ने बताया कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) कई दवाओं की अधिकतम कीमत तय करता है। 25 मार्च 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सेफ्ट्रियाक्सोन के 500 एमजी इंजेक्शन की सीलिंग कीमत 51.49 रुपये और 1000 एमजी की 63.88 रुपये थी। सेफ्यूरोक्सिम के 1500 एमजी इंजेक्शन की कीमत 346.90 रुपये निर्धारित थी। सीलिंग कीमत, खरीद मूल्य और एमआरपी अलग-अलग हो सकते हैं।
जल्द चलेगा जांच अभियान
सीएमओ डॉ. भारत भूषण ने बताया कि अस्पतालों और एजेंसियों को उचित कीमत पर दवाएं बेचने के निर्देश दिए गए हैं। एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने की लिखित शिकायत नहीं मिली है। फिर भी जल्द अभियान चलाकर दवाओं की कीमतों की जांच की जाएगी।