बरसात के अभाव में सूख रही खरीफ को देखते हुए जिला प्रशासन जिले को सूखाग्रस्त घोषित करवाने की कवायद में जुटा है। डीएम ने सभी लेखपालों को फसल क्षति का आकलन कर तीन दिन में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। रिपोर्ट मिलते ही प्रमुख सचिव को पत्र लिख जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया जाएगा।
जिले में कम हुई बरसात से किसान काफी परेशान है। गेहूं की फसल अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से नष्ट हो गई थी। कम बरसात से खरीफ की फसल भी नष्ट होने की कगार पर है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक जिले में अब तक मात्र 37 प्रतिशत बरसात होने से धान की फसल में किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। किसानों को इस परेशानी से निजात दिलवाने के लिए जनप्रतिनिधियों व किसान नेताओं की मांग पर जिलाधिकारी जगतराज त्रिपाठी ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित करवाने की कवायद शुरू कर दी है।
डीएम ने सभी लेखपालों को खरीफ फसल की क्षति का आकलन कर तीन दिन में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। लेखपालों की रिपोर्ट मिलते ही उसे शासन को भेज कर जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की जाएगी। अगले सप्ताह प्रमुख सचिव के साथ मंडलायुक्त व डीएम की बैठक में इस पर चर्चा हो सकती है। इसलिए जिला प्रशासन बैठक में जाने से पहले पूरी तैयारी करना चाहता है। अपर जिलाधिकारी सूर्यनारायण यादव ने बताया कि फसल क्षति का आकलन किया जा रहा है। रिपोर्ट मिलते ही जिलाधिकारी शासन को सूखे की स्थिति से अवगत कराएंगे।
जिले में 1,10,901 हेक्टेयर में हुई खरीफ की खेती
जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह ने बताया कि जिले के 1,10,901 हेक्टेयर में खरीफ की फसल की बोआई हुई है। इसमें 1,00,785 हेक्टेयर धान, 660 हेक्टेयर मक्का, 3664 हेक्टेयर ज्वार, 162 हेक्टेयर बाजरा, 3310 हेक्टेयर उर्द, 58 हेक्टेयर मूंग, 268 हेक्टेयर तिल, 1870 हेक्टेयर अरहर व 124 हेक्टेयर मोटा अनाज की खेती-किसानों ने की है। जनपद में मात्र 37 प्रतिशत बरसात होने की बात भी जिला कृषि अधिकारी ने स्वीकार की है।