स्थानीय तहसील के गूजरटोला गांव में करीब ढाई दशक से बंद पड़ी ऊषा रेक्टीफायर फैक्ट्री में मशीनों को काटने का काम मंगलवार सुबह फिर शुरू हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने फैक्ट्री की मशीनों को काटने का काम बंद करा दिया है। पुलिस ने कबाड़ी को एसडीएम का आदेश दिखाने को कहा है। दो माह पूर्व भी फैक्ट्री में मशीन कटान का काम शुरू हुआ था, जिसे पुलिस ने बंद करा दिया था। उसके बाद कटान में लगे मजदूर वापस लौट गए थे।
राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते वर्ष 1985 में राय ग्रुप ने स्थानीय तहसील के गूजरटोला गांव में 50 एकड़ जमीन लेकर ऊषा रेक्टीफायर फैक्ट्री की स्थापना की थी। लोहे की चादर बनाने वाली इस कंपनी में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार मिला था। वहीं कुछ किसानों की जमीन अधिग्रहीत भी की गई थी। करीब दो अरब रुपये की लागत से स्थापित यह फैक्ट्री कुछ दिन तक ठीक-ठाक चलने के बाद वर्ष 1996 में पूरी तरह बंद हो गई। फैक्ट्री बंद होने के बाद करीब दो दशक से यहां लगी मशीनों की सुरक्षा के लिए कंपनी के मालिकान ने तीन गार्डों को तैनात किया था।
इसी बीच बीते अक्तूबर माह में दिल्ली से आए कुछ लोगों ने गैस कटर के जरिए बंद पड़ी फैक्ट्री की मशीनों को काटना शुरू कर दिया। निष्प्रयोज्य पड़ी मशीनों को काटने वालों ने गार्डों को बताया कि उन्होंने कंपनी के मालिकान से सौदा किया है। हालांकि काम शुरू होने के बाद शिकायत पर एसडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने पुलिस को भेजकर काम बंद करवा दिया था जिसके बाद वे वापस लौट गए थे। सोमवार शाम दोबारा गैस कटर आदि के साथ पहुंचे मजदूरों ने मशीनों को काटने का काम शुरू कर दिया। मशीनों को कटते देख गूजरटोला के लोगों ने इसकी सूचना एसडीएम व पुलिस को दी।
प्रभारी निरीक्षक भरतराज सिंह ने बताया कि एसडीएम के कहने पर वे मौके पर गए थे। काम बंद करवा दिया गया है। मशीनों को काटने पहुंचे लोगों से कहा गया है कि वे इसे खरीदने व काटने के वैध कागजात एसडीएम को दिखाकर अनुमति लें। तभी कटान कर सकेंगे। बिना अनुमति दोबारा कटान शुरू हुई तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।