सुल्तानपुर। आरक्षण के विरोध में पोस्ट ऑफिस में तोड़फोड़ करके बवाल करने के मामले में 32 साल बाद बुधवार को कोर्ट ने फैसला सुना दिया। एडीजे प्रथम संतोष कुमार ने इस मामले में 13 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। जबकि, एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 19 दिसंबर 1992 को कुड़वार थाने के तत्कालीन एसओ विष्णुदास शुक्ल ने बीपी इंटरमीडिएट कॉलेज, कुड़वार के छात्रों के खिलाफ जानलेवा हमला करने, बलवा व सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि छात्रों ने आरक्षण के विरोध में सरकार के खिलाफ नारे लगाकर बवाल किया था। कुड़वार पोस्ट ऑफिस में तोड़फोड़ की थी। इसमें सिपाही जगदंबा प्रसाद दुबे, रामचंद्र व घनश्याम तिवारी को चोटें आई थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुड़वार के पूर्व ग्राम प्रधान नित्यानंद तिवारी व सिपाही रामसंवारे चौधरी की गवाही दर्ज की गई।
बचाव पक्ष की ओर से अभियोजन प्रपत्रों को स्वीकार कर लिया। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने सभी 13 आरोपी छात्रों को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का फैसला सुनाया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी क्रिमिनल वेद प्रकाश शर्मा ने और बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीर्जुरहमान, विजेंद्र द्विवेदी, हरिश्चंद्र दुबे, अनिल दुबे, मदन तिवारी, रविकांत मिश्र, ओम प्रकाश मिश्र ने पैरवी की।
इन छात्रों को मिली राहत
कोर्ट के फैसले से आरोपी बनाए गए 13 छात्रों को राहत मिली है। इनमें नंद कुमार सिंह, विनोद सिंह, शैलेंद्र कुमार, मनोज तिवारी, रमेश मिश्र, ललित तिवारी, उमेश तिवारी, संतोष सिंह, रामकरन, ओम प्रकाश तिवारी, कौशलेंद्र मिश्र, सुरेश पाठक व संदीप तिवारी शामिल हैं। आरोपी विजयधर मिश्र की सुनवाई के दौरान मौत हो गई है।