सुल्तानपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुुनाव के आरक्षण में सत्तासीनों के मुताबिक सीटों का आरक्षण नहीं करना प्रभारी डीपीआरओ को महंगा पड़ा। शासन ने चल रही आरक्षण प्रक्रिया के दौरान ही प्रभारी डीपीआरओ सर्वेश कुमार पांडेय का प्रभार छीन लिया। उनके स्थान पर लखीमपुर खीरी के डीपीआरओ को आनन-फानन में तैनात कर दिया गया। कार्रवाई से प्रक्रिया में शामिल अन्य अफसर भी सकते में आ गए हैं। प्रक्रिया के दौरान प्रभारी डीपीआरओ का चार्ज छीने जाने से आरक्षण में गड़बड़ी की संभावना बढ़ गई है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख व ग्राम प्रधान की सीटों का आरक्षण सत्तासीनों के मनमुताबिक नहीं करना प्रभारी डीपीआरओ को महंगा पड़ गया। शासन ने नेताओं की शिकायतों पर प्रभारी डीपीआरओ सर्वेश पांडेय का प्रभार मंगलवार को छीन लिया। उनके स्थान पर शासन ने लखीमपुर खीरी के जिला पंचायतराज अधिकारी योगेंद्र सिंह कटियार की तैनाती कर दी है।
शासन से सोमवार की शाम जारी आदेश मंगलवार को जिले में पहुंच गया। हालांकि प्रभारी डीपीआरओ बनाए गए वरिष्ठ एडीओ पंचायत सर्वेश कुमार पांडेय को जिले से नहीं हटाया गया है। आरक्षण प्रक्रिया के दौरान प्रभारी डीपीआरओ को हटाए जाने से जिले में हड़कंप मच गया है। आरक्षण प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में लगे अन्य अधिकारी-कर्मचारी सकते में आ गए हैं। सूत्रों की मानें तो उनके ऊपर सत्तासीनों के मुताबिक आरक्षण करने एवं आरक्षण नहीं करने पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया था। प्रक्रिया के दौरान प्रभारी डीपीआरओ के खिलाफ हुई कार्रवाई से आरक्षण में गड़बड़ी की संभावना भी बढ़ गई है।
चार दिनों से सांसत में अधिकारी
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए 24 अगस्त से शुरू आरक्षण प्रक्रिया के दौरान इसमें लगे अफसर सांसत में थे। सूत्रों के मुताबिक उन पर जिले स्तर के साथ ही शासन स्तर से भी सत्तासीनों के मुताबिक विभिन्न पदों की सीटों को आरक्षित करने का लगातार दबाव डाला जा रहा था। शासन के कई अधिकारियों एवं मंत्रियों तक के फोन से अधिकारी परेशान थे। कई विधायक भी अपने मनमुताबिक सीटों को आरक्षित अथवा अनारक्षित कराने का दबाव बना रहे थे। उधर, शासन के कड़े नियम एवं लोगों की जागरूकता को देखते हुए अधिकारी दबाव के बीच भी सत्तासीनों के मुताबिक आरक्षण करने का साहस नहीं जुटा पाए। चार दिन पहले ग्राम प्रधान व ब्लॉक प्रमुखों की सीट करीब फाइनल होने एवं सोमवार की शाम तक जिपंस की सीटों के तकरीबन फाइनल होने से राजनीतिक परेशान हो गए। सूत्रों के मुताबिक दो दिनों से सत्तासीनों का एक तबका लखनऊ में डीपीआरओ को हटवाने के लिए अड़ गया था। सोमवार को जब फोन के बाद भी डीपीआरओ अपने कड़े रुख पर कायम रहे तो शाम को ही उनका चार्ज छीन लिया गया।
अन्य अधिकारियों पर और बढ़ा दबाव
प्रभारी डीपीआरओ का आरक्षण प्रक्रिया के दौरान चार्ज छीने जाने के बाद प्रक्रिया में शामिल जिलाधिकारी अदिति सिंह, मुख्य विकास अधिकारी श्रीकांत मिश्र एवं अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत पर दबाव और बढ़ गया है। सत्तासीनों के मुताबिक सीटों को आरक्षित व अनारक्षित नहीं करने पर अधिकारियों को कार्रवाई का भय तो गलत करने पर कोर्ट का भय सता रहा है। ऐेसे में अन्य अधिकारियों में बेचैनी है।
इनसेट
डीएम ने की कार्रवाई की पुष्टि
जिलाधिकारी अदिति सिंह ने कार्रवाई की पुष्टि की। बताया कि सोमवार की रात को आदेश आ गया है। नए डीपीआरओ ने अभी चार्ज नहीं लिया है।