सुल्तानपुर। 40 साल पहले तहसीलदार की नेम प्लेट लगाकर जीप से पहुंचकर हमला करने के आरोप से जुड़े मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाया। एसीजेएम स्मृति चौरसिया की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया।
कादीपुर कोतवाली के ढेमा गांव निवासी वादी दामोदर प्रसाद उपाध्याय ने 16 नवंबर 1985 की शाम करीब तीन बजे की घटना बताते हुए मोतिगरपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। वादी के आरोप के मुताबिक तहसीलदार की नेम प्लेट लगाकर जीप से उनके गांव के आरोपी कृष्णमणि उपाध्याय वर्तमान जिला अंबेडकरनगर के अकबरपुर के नासिर का पुरवा निवासी सहआरोपी कृपाराम तिवारी व प्रभंजन विश्वकर्मा अपने अन्य साथियों के साथ आकर घर में महिलाओं को धमकाया। शोर सुनकर पहुंचे तो आरोपियों ने हमला कर दिया। घटना में राम लखन उपाध्याय को चोटें आईं।
आरोपियों के खिलाफ मोतिगरपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई और आरोपी कृष्णमणि उपाध्याय, कृपाराम तिवारी व प्रभंजन विश्वकर्मा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ। इस मामले का विचारण स्मृति चौरसिया की अदालत में चल रहा था। आरोपी कृष्णमणि उपाध्याय की पूर्व में मृत्यु हो चुकी है। शेष दो आरोपियों के खिलाफ विचारण चल रहा था। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों को कड़ी सजा से दंडित किए जाने की मांग किया। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपियों को बेकसूर बताया। उभय पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने शनिवार के लिए फैसले की तारीख तय किया था। अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाते हुए साक्ष्य के अभाव में आरोपी कृपाराम तिवारी व प्रभंजन विश्वकर्मा को दोषमुक्त करार दे दिया।