सुल्तानपुर। पर्दानशीं हो...जहीन हो...घर ही संभालो। बाहर निकली तो लोग क्या बोलेंगे। ताने मिलेंगे। इन जैसी बातों को दरकिनार करते हुए दूबेपुर के पैगापुर निवासी अंजुम बानो ने स्वरोजगार की राह चुनी। चाय की पैकेजिंग से तरक्की का ऐसा चस्का लगा कि आज सब उनकी मिसाल देते हैं। अंजुम खुद के साथ ही गांव की 30 अन्य महिलाओं को भी जोड़ उन्हें भी आत्मनिर्भर बना रही हैं।
अंजुम बताती हैं कि असम से सादी (प्लेन) चाय मंगाती हैं। इसके बाद उसमें अदरक, लौंग, इलाइची, हरी पत्ती, काली पत्ती को मिलाकर पैकेजिंग करती हैं। इसमें उनकी मदद गांव की ही शीतला, यागीस, ताज व रहमत समूह की रेशमा बानो, गीता देवी समेत 30 महिलाएं करती हैं। पैकेजिंग के बाद समूह के सहयोग से ही चाय की बिक्री भी करती हैं। अभी कुड़वार, शहर व दूबेपुर में मार्केटिंग टीम भी तैयार कर ली है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के मिशन प्रबंधक रामराज ने बताया कि दिल्ली में या वारिस समूह की चाय का स्टाॅल लगवाया गया था। इसमें समूह की ओर से तैयार पूरी चाय बिक गई। चाय का स्वाद अच्छा होने के कारण इसकी लगातार मांग बढ़ रही है। हमारी कोशिश इसे अन्य प्रदेशों में भी बिक्री की है।
तीन तरह की चाय हो रही तैयार
अभी समूह की ओर से तीन तरह की चाय मोटा दाना, मीडियम और महीन दाना बनाई जा रही है। 100 ग्राम और 250 ग्राम के पैकेट ज्यादा बिक्री हो रही है। चाय में काली और हरी पत्ती स्वाद बढ़ाने के लिए मिलाई जाती है।
महिलाओं ने पेश की मिसाल
एनआरएलएम के उपायुक्त केडी गोस्वामी ने बताया कि समूह की महिलाओं ने मिसाल पेश की है। स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन खुद के साथ ही परिवार को भी आगे बढ़ा रही हैं। इन महिलाओं के बच्चे आज अच्छे स्कूलों में पढ़ रहे हैं। इका जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है।