पयागीपुर। शारदीय नवरात्र में पयागीपुर चौराहा आस्था और रोशनी से जगमगाएगा। श्री विंध्यवासिनी माता पूजा समिति की ओर से आयोजित दुर्गा पूजा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। 1975 में भोलानाथ पाठक की ओर से शुरू की गई यह परंपरा 51 वर्ष पूरे कर चुकी है। पांच दशक से अधिक समय से चले आ रहे इस आयोजन ने भव्य रूप ले लिया है और हर वर्ष श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनता है।
इस बार दुर्गा पूजा महोत्सव की शुरुआत दशहरा के दिन 20 अक्टूबर से होगी। समिति की ओर से कोलकाता की तर्ज पर करीब 90 फीट ऊंचा भव्य पंडाल तैयार कराया जा रहा है। झारखंड के कारीगर पंडाल को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। विद्युत सजावट के साथ भव्य दरबार दूर से ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगा।
थीम पर होती है पंडाल की सजावट
समिति हर वर्ष अलग-अलग थीम पर पंडाल सजाती है। इससे पहले नेपाल के जनक महल, वृंदावन, सीतामाता और राजस्थान सहित विभिन्न धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की झलक पंडाल में देखने को मिल चुकी है। इस बार कोलकाता की भव्यता उतारने की तैयारी है। राम वनगमन मार्ग पर स्थित होने से पयागीपुर का यह आयोजन खास महत्व रखता है। प्रयागराज की ओर से सुल्तानपुर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भव्य पंडाल प्रमुख आकर्षण बनेगा। समिति अध्यक्ष विमलेश पाठक, महामंत्री शैलेंद्र पाठक, कोषाध्यक्ष सत्यवीर यादव, गिरीश मिश्रा सभासद, देवेश तिवारी, प्रदीप पाठक (रामू), रघुवीर पाठक और संतोष पाठक समेत अन्य सदस्य आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।
एक दरबार में होंगे कई देवी-देवताओं के दर्शन
पंडाल में मां विंध्यवासिनी के साथ भगवान कार्तिकेय, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। श्रद्धालुओं को एक ही दरबार में कई देवी-देवताओं के दर्शन होंगे। समिति के अनुसार आयोजन पर करीब पांच लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
धार्मिक आयोजनों के साथ होगा भंडारा
नवरात्र के दौरान विशेष दुखदुरिया, सुंदरकांड पाठ, महाआरती, भंडारा और प्रतिदिन पूजा-पाठ का आयोजन होगा। महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। भंडारे में प्रसाद भी वितरित किया जाएगा।