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जब तक सूरज-चांद रहेगा आशीष तेरा नाम रहेगा...

Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
Sultanpur
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सुल्तानपुर। भारत के प्रथम स्वाधीनता आंदोलन में ब्रिटिश फौजों के साथ हुई लड़ाई में सैकड़ों लोगों की शहादत का गवाह बनी चांदा की धरती मंगलवार को फिर गौरवान्वित हुई। तीन दिन के इंतजार के बाद अरुणाचल प्रदेश में भारत चीन सीमा पर शहीद हुए आशीष सिंह का शव पैतृक गांव गलहिता पहुंचा गम के बीच लोगों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। जब तक सूरज चांद रहेगा आशीष तेरा नाम रहेगा... के नारों से आसमान गूंज उठा। शहीद का अंतिम संस्कार गोमती नदी के किनारे स्थित धोपाप घाट पर किया गया। आईटीबीपी जवानों की अंतिम सलामी के बाद शहीद के पिता ने बेटे को मुखाग्नि दी।
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चांदा थाना क्षेत्र के गलहिता गांव निवासी नागेंद्र बहादुर सिंह का बड़ा पुत्र आशीष सिंह आईटीबीपी में 2009 में भर्ती हुआ था। आशीष 31 बटालियन चार्ली कंपनी में तैनात था। 16 नवंबर को आशीष सिंह अरुणाचल प्रदेश के काउसेट ओपी पोस्ट पर शहीद हो गया था। मंगलवार दोपहर 31 बटालियन इंडो इंडिया तिब्बत सीमा पुलिस अरुणाचल प्रदेश और इलाहाबाद से 18वीं बटालियन के जवान शहीद का पार्थिव शरीर लेकर गलहिता गांव पहुंचे। जैसे ही आशीष का पार्थिव शरीर जवानों ने वाहन से उतारा परिजनों के साथ ही ग्रामीणों के आंसू छलक पड़े। शहीद को तहसीलदार लंभुआ संजय कुमार ने पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्घांजलि दी। तकरीबन आधे घंटे बाद तिरंगे में लिपटे शहीद की शवयात्रा धोपाप घाट के लिए निकल पड़ी। हजारों की भीड़ और जवानों के कंधों पर शहीद का पार्थिव शरीर। बीच-बीच में नारे लगाते लोग, जब तक सूरज-चांद रहेगा आशीष तेरा नाम रहेगा...। गलहिता गांव से शवयात्रा लंभुआ के धोपाप घाट पहुंची। जहां पिता नागेंद्र बहादुर सिंह ने बेटे की चिता को मुखाग्नि दी। इस मौके पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने अपने साथी को अंतिम सलामी दी।
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