राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना फेज-12 के तहत जिले के चयनित मजरों में नई विद्युत लाइन तैयार करने का काम कर रही कार्यदायी संस्था की धीमी प्रगति से नाराज प्रबंधन ने उससे अनुबंध समाप्त कर दिया है। कार्यदायी संस्था और प्रबंधन के बीच हुआ करार समाप्त होने से जिले के कई गांवों में चल रहे काम ठप हो गए हैं। केंद्र की ओर से संचालित इस योजना के तहत कार्यदायी संस्था को 99 करोड़ रुपये की लागत से जिले के 2,948 मजरों में नई विद्युत लाइन बनाने के साथ ही जर्जर लाइन को बदला जाना था।
केंद्र की मौजूदा सरकार ने करीब एक वर्ष पूर्व राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना फेज-12 के तहत जिले के उन गांवों में नई लाइन बनाने के साथ ही ऐसे गांवों की विद्युत लाइनें बदलने की योजना को हरी झंडी दी थी जहां की लाइनें जर्जर हो गई थीं। योजना के तहत जिले के 13 ब्लॉकों के 2,948 मजरों का चयन किया गया था। मजरों का चयन पूरा होने और केंद्र सरकार की ओर से 99 करोड़ रुपये का आवंटन मिलने के बाद पारेषण प्रबंधन ने मेसर्स वैरिगेट प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ अनुबंध कर उसे कार्यदायी संस्था नामित किया था।
नामित संस्था ने करीब एक वर्ष पूर्व जिले में पहुंचकर काम शुरू किया था। केंद्र के साथ प्रदेश सरकार और पारेषण प्रबंधन की ओर से कार्यदायी संस्था को कार्य पूरा करने के लिए एक वर्ष की डेडलाइन तय की गई थी। हालांकि काम पानी वाली संस्था की ढिलाई का आलम यह रहा कि प्रत्येक समीक्षा बैठक में उसके जिम्मेदार अधिकारी आला अफसरों की लताड़ सुनते रहे। बावजूद इसके उनके काम में तेजी नहीं आई। संस्था की इस उदासीनता से नाराज प्रबंधन ने अंत में कार्यदायी संस्था से किया हुआ करार समाप्त कर उसे वापस लौट जाने को कह दिया है।
सिर्फ 18 मजरों में हुआ काम
कार्यदायी संस्था ने करीब एक वर्ष में सिर्फ 18 मजरों में ही विद्युतीकरण का काम पूरा किया। यह वे मजरे थे, जिनका चयन वित्तीय वर्ष 2014-15 में समग्र ग्राम योजना के तहत हुआ था।