गौरीगंज। 1980 के दशक में औद्योगिक क्षेत्र कौहार स्थित 65.57 एकड़ भूमि पर मेसर्स सम्राट बाइसकिल के नाम से कंपनी चलाने में असफल रहे जैन बंधुओं की पूरी जमीन की नीलामी बीते 24 फरवरी को 20.10 करोड़ रुपये में हुई थी। नीलामी में इस जमीन को लेने वाले राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट ने एक करोड़ 50 हजार रुपये की स्टांप भी ड्यूटी चुकाई थी। हालांकि नीलामी प्रक्रिया में भूमि का विक्रय होने की जानकारी मिलने के बाद यूपीएसआईडीसी जहां क्रय-विक्रय की प्रकिया को ही गलत बता रहा है वहीं रविवार को स्मृति ने इस मुद्दे पर कांग्रेस उपाध्यक्ष को कटघरे में खड़ा कर नई बहस छेड़ दी है।
अमेठी में रविवार को जनसभा में स्मृति ने सम्राट बाइसकिल की जिस भूमि को राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा खरीदे जाने के मामले में राहुल गांधी को कटघरे में खड़ा किया उसकी कहानी लंबी है। अभिलेखों के मुताबिक यूपीएसआईडीसी ने आठ अगस्त 1986 को 65.57 एकड़ भूमि मेसर्स सम्राट बाइसकिल के नाम पट्टा किया था। यूपीएसआईडीसी के जिम्मेदार अधिकारियों के आरोपों पर यकीन करें तो कंपनी ने कूटरचना कर निगम के स्वामित्व वाली इस भूमि को राजस्व अभिलेखों में अपने नाम दर्ज करवा कर इस पर बड़ा ऋण लिया।
कुछ दिनों तक चलने वाली यह कंपनी बाद में बंद हो गई। कंपनी बंद होने के बाद डीआरटी ने ऋण की वसूली करने के लिए 24 फरवरी 2015 को इसकी नीलामी करवा दी। नीलामी में बोली लगाने के लिए राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से मौजूद सीएच जोशी ने इस संपूर्ण भूमि को 20.10 करोड़ में लेकर इस पर ई-स्टांपिंग के जरिए एक करोड़ 50 हजार रुपये की स्टांप ड्यूटी चुकता की।
यूपीएसआईडीसी लगा चुका आपत्ति
मेसर्स सम्राट बाइसकिल को पट्टा दी गई भूमि की नीलामी की जानकारी होने के बाद यूपीएसआईडीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक आरएस पाठक ने बीत दो जून को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर भूमि के क्रय विक्रय को गलत बताया। पाठक ने कहा कि जिस भूमि को पट्टे पर दिया गया हो उसे नीलाम कैसे किया जा सकता है। पाठक ने जिला प्रशासन से राजस्व अभिलेखों में भूमि को क्रेता के पक्ष में आवंटित नहीं करने का अनुरोध किया है।