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मौसम ने दिया दगा, बारिश नहीं होने से सूखने लगीं फसलें

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दगा दे रही बारिश
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सूखने लगीं फसलें
क्रासर
धान की 96009 हेक्टेयर फसल पर छाया संकट
पखवारे भर से नहीं हुई तेज बारिश
गर्मी और उमस ने बढ़ाई लोगों की परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर। मौसम विभाग ने इस बार तकरीबन 98 फीसदी बारिश होने की भविष्यवाणी की थी। इसको देखते हुए जिले में किसानों ने खरीफ की मुख्य फसल धान की खेती करने के लिए क्षेत्रफल बढ़ा दिया था। किसान मई व जून माह में ही अधिक क्षेत्रफल में धान की फसल तैयार करने के लिए नर्सरी डाली थी। जुलाई माह के शुरुआत में मौसम ने किसानों का साथ दिया था और बारिश सही ढंग से हो रही थी। जुलाई माह में कुछ किसानों ने बारिश के पानी से ही धान की रोपाई करा डाली थी। जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में और अगस्त के पहले सप्ताह में किसानों को निजी नलकूप, नहर और राजकीय नलकूप के सहारे धान की रोपाई करानी पड़ी थी। कृषि विभाग की मानें तो जिले में किसानों ने 96009 हेक्टेयर में धान की खेती की है। धान की रोपाई कराने के बाद किसान उम्मीद लगाए बैठे थे कि अगस्त माह में ठीक ढंग से बरसात होगी। अनुमान के विपरीत तकरीबन पखवारे भर से तेज बारिश नहीं होने किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। किसान इस बात को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं कि अगस्त और सिंतबर माह में बारिश नहीं होने पर उनकी गाढ़ी कमाई से तैयार धान की फसल सूख जाएगी। मौसम के दगा देने से कहीं-कहीं पर धान की फसल सूखनी शुरू हो गई है। आगे भी ऐसे ही हालात रहे तो धान की फसल का उत्पादन घट जाएगा।
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इनसेट
नमी बनाए रखने के लिए करें सिंचाई: जिला कृषि रक्षा अधिकारी
जिला कृषि रक्षा अधिकारी अरुण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि जुलाई, अगस्त व सिंतबर माह मुख्य रूप से बारिश का समय माना जाता है। अनुमान के मुताबिक बारिश नहीं हो रही है। वे कहते है कि किसानों को चाहिए कि हर हाल धान की फसल की सिंचाई करके नमी बनाए रहें। नमी नहीं रहने से फसल की वृद्धि पर असर पड़ेगा।
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