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‘फसल बचाने के लिए भूमि शोधन जरूरी’
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अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर। फसलों में लगने वाले रोगों के बीजाणु बीज में और भूमि में अवशेष के रूप में जीवित रहते हैं। ऐसे बीजाणु फसल की बुआई/रोपाई के बाद अनुकूल परिस्थिति पाने पर अपना प्रभाव दिखाते हैं और फसल को रोगग्रस्त बनाते हैं। इसमें धान का झुलसा रोग, अरहर का फाल्स स्मट रोग और अन्य दलहनी फसलों में उकठा रोग शामिल है। फसलों में लगने वाले कीटों के अंडे जमीन के अंदर मौजूद रहते हैं। इन रोगों व कीटों से फसल को बचाने के लिए भूमि शोधन करना जरूरी होता है। भूमि शोधन नहीं करने पर ऐसे रोग व कीट फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। जिला कृषि रक्षा अरुण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि भूमि जनित रोगों व कीटों से फसलों को बचाने के लिए भूमि शोधन करना चाहिए। इसके लिए जैविक फफूंदीनाशी ट्राईकोडरमा, जीवाणुनाशी स्यूडोमोनास की ढाई किलोग्राम मात्रा 40 से 50 किलोग्राम गोबर की सड़ी खाद में मिलाकर पानी से हल्का गीला करके एक सप्ताह छाए में सुखाने के बाद फसल की बुआई व रोपाई करने से पहले खेत में छीटकर जुताई कराना चाहिए।
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राशन वितरण में धांधली की शिकायत
सुल्तानपुर। कुड़वार ब्लॉक के ग्राम चंदापुर मौजा कोटा गांव निवासी रामप्रकाश तिवारी ने एसडीएम सदर को प्रार्थनापत्र देकर राशन वितरण में की जा रही अनियमितता की जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कोटा गांव के कोटेदार की मृत्यु होने के बाद राशन की दुकान को पड़ोस के गांव विनायकपुर से संबद्घ कर दिया गया है। उनका आरोप है कि विनायकपुर का कोटेदार राशन वितरण में धांधली कर रहा है और कार्डधारकों से निर्धारित से अधिक मूल्य की वसूली कर रहा है।
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