नलकूप विभाग की ओर से स्थापित सिंचाई के संसाधन किसानों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। हालत यह है कि जिले के 14 विकास खंडों में 469 नलकूपों की स्थापना की गई है लेकिन वर्तमान में 40 नलकूप खामियों की वजह से संचालित नहीं हो रहे हैं। 40 नलकूपों से संबंधित क्षेत्र में सिंचाई नहीं हो पा रही है। इससे फसलोत्पादन भी प्रभावित हो रहा है।
मौजूदा समय में किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता है। खरीफ की फसल की सिंचाई के समय नलकूपों का बंद होना किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। जिले में 469 राजकीय नलकूपों की स्थापना की गई है।
विभागीय स्तर पर बजट व अन्य समस्याआें की वजह से सभी नलकूपों का संचालन सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा है। विभागीय स्तर पर पहले ही 20 नलकूपों को क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया था। जीर्णोद्धार के लिए योजना बनाकर शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन बजट न मिलने के चलते इन नलकूपों की मरम्मत नहीं हो सकी।
क्रिटिकल श्रेणी में आने वाले नलकूप करौंदीकलां, अखंडनगर, लंभुआ, बल्दीराय, दूबेपुर व धनपतगंज ब्लॉक के थे। इसके अलावा 20 अन्य राजकीय नलकूप भी विभिन्न खामियों से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो करीब 40 नलकूपों का संचालन ठप है।
इसके लिए शासन से बजट ती मांग की गई है। बजट नहीं मिलने से नलकूप नहीं संचालित हो पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि नलकूपों के खराब होने से इससे खेतों में पैदावार प्रभावित हो रही है।
नलकूप विभाग के अधिशाषी अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि बजट न मिलने से नलकूपों का संचालन सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा है। समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।