सुल्तानपुर। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के दो वर्षों के करीब 4,331 आवेदन पोर्टल पर भी लटक गए हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से सत्यापन में रुचि नहीं लेने से पात्र कन्याओं को दो वर्षों से योजना का लाभ नहीं मिल सका है। इसके साथ ही जिले की रैंकिंग भी नीचे आ गई है। रैंकिंग गिरने से शासन में जिले की फजीहत हुई है।
शासन की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना में अधिकारियों ने जिले की खूब फजीहत कराई है। योजना में आवेदन करने वाली विभिन्न स्तर की कन्याओं के 4,331 आवेदन दो वर्षों से अधिकारियों के पोर्टल पर लंबित पड़े हैं।
इसमें बीते वित्तीय वर्ष के करीब 2463 व चालू वित्तीय वर्ष के 1868 आवेदन शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक शहरी क्षेत्रों के दोनों वर्षों के 452 व शेष ग्रामीण क्षेत्र के हैं। शासन के निर्देश पर जिन अधिकारियों केे जिला प्रशासन से सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई है, उसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, खंड विकास अधिकारी व उपजिलाधिकारी हैं।
इन अधिकारियों के सत्यापन के बाद योजना का आवेदन जिला प्रोबेशन विभाग के पोर्टल पर अग्रसारित किया जाना था। शासन व जिला प्रशासन के निर्देश के बाद भी इन अधिकारियों ने कन्याओं के आवेदन को सत्यापन करने में रुचि नहीं दिखाई।
इसकी वजह से शासन में जिला प्रोबेशन विभाग की इस योजना में रैंकिंग धड़ाम हो गई है। रैंकिंग गिरने से समीक्षा में जिला प्रशासन को फजीहत का सामना करना पड़ा है। साथ ही पात्र बेटियां भुगतान से वंचित रह गई हैं। शासन व मंडलायुक्त की ओर से नाराजगी जताए जाने के बाद जिलाधिकारी ने सुस्ती पर जिम्मेदार अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई है। साथ ही लंबित आवेदनों को सत्यापन कर जल्द आगे बढ़ाने का निर्देश जारी किया है।
जिलाधिकारी रवीश गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत सत्यापन में खराब स्थिति पाई गई है। सत्यापन में ढिलाई से जिले की छवि धूमिल हो रही है। जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल सत्यापन का निर्देश दिया गया है। सुस्ती पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी।