सुल्तानपुर। जिला अस्पताल समेत जिले के छह स्वास्थ्य केंद्रों पर खुले जन औषधि केंद्रों के बंद होने से मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोग कई गुना अधिक दाम देकर दवाएं खरीदने को मजबूर हैं। शासन ने जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल के साथ ही कादीपुर, जयसिंहपुर, लंभुआ और कुड़वार सीएचसी में खुले सरकारी जन औषधि केंद्र को दवा आपूर्ति करने वाली फर्म का ठेका निरस्त कर दिया था।
शासन के आदेश के बाद सीएमओ ने पीएम जन औषधि केंद्र का संचालन करने वाली फर्म को नोटिस जारी करते हुए इन छह केंद्रों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया। सीएमओ के आदेश के बाद जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, कादीपुर, कुड़वार, जयसिंहपुर और लंभुआ में खुले जन औषधि केंद्र बंद हो गए।
इन अस्पतालों में खुले जन औषधि केंद्रों के बंद होने से मरीजों को कम कीमत पर जेनरिक दवाएं नहीं मिल रही हैं। इस वजह से मरीजों को अस्पताल से बाहर मेडिकल स्टोरों से कई गुना अधिक दाम देकर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों व उनके तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सीएमओ डॉ. चंद्रभूषण नाथ त्रिपाठी ने बताया कि शासन के आदेश पर मात्र जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, जयसिंहपुर, कादीपुर, लंभुआ और कुड़वार में स्थित सीएचसी के अंदर खोले गए जन औषधि केंद्र को बंद किया गया है। अस्पताल के बाहर कई अन्य जन औषधि केंद्र खुले हैं। मरीजों अथवा तीमारदारों को बाहर खुले जन औषधि केंद्रों से जेनरिक दवाएं खरीदनी चाहिए।
सीएमओ डॉ. चंद्रभूषण नाथ त्रिपाठी ने बताया कि किसी एक बीमारी के इलाज के लिए तमाम प्रयोग के बाद एक रसायन तैयार होता है, जिसे आसानी से उपलब्ध कराने के लिए उसे दवा की शक्ल दे दी जाती है। इस साल्ट को तमाम दवा कंपनियां अलग-अलग नामों से बेचती हैं।
कोई इसे महंगे दामों में बेचती है तो कोई सस्ते में, लेकिन इस साल्ट का जेनेरिक नाम साल्ट के कंपोजिशन और बीमारी को ध्यान में रखते हुए एक विशेष समिति की ओर से निर्धारित किया जाता है। किसी साल्ट का जेनेरिक नाम पूरी दुनिया में एक ही रहता है। हार्ट, न्यूरो, डायबिटीज, किडनी, यूरिन, बर्न जैसी बीमारियों में ये उपयोगी होती हैं।