सुल्तानपुर। 21 वीं सदी के भारत में लंभुआ तहसील क्षेत्र की करीब 35 हजार आबादी करीब तीन दशक पहले के माहौल में जीवन बसर कर रही है।
बच्चे हों या युवा या फिर बुजुर्ग रोज चार फिट चौड़े लकड़ी के एक ऐसे पुल से गुजर रहे हैं, जिसे ग्रामीणों ने भरसारे-अलीपुर के बीच से गुजरी बालमपुर ड्रेन के ऊपर आपसी सहयोग से बनवाया था।
सोचने वाली बात यह है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने न 12 साल पहले इस पर ध्यान दिया, न अब दे रहे हैं। इस पुल से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
एक तरफ सरकार लोगों की बुनियादी सहूलियतों को लेकर संजीदा होने का दावा करती है। सड़क, संपर्क मार्ग व पुल के विस्तार का दम भरा जाता है लेकिन दूसरी ओर लंभुआ तहसील में एक स्थान ऐसा भी है जहां से किसी बुजुर्ग के गुजरने पर उसे करीब तीन दशक पहले की दशा का भान हो जाए।
यहां के लोग आज भी 12 बरस पुराने लकड़ी के अस्थाई पुल से रोजाना जान जोखिम में डालकर गुजर रहे हैं। तहसील के भरसारे-अलीपुर संपर्क मार्ग पर बालमपुर ड्रेन के ऊपर सन1990 में स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से पक्के पुल का निर्माण करवाया गया था।
तब ड्रेन की गहराई करीब 15 फिट थी। यहां पुल बनने से लोगों को आवाजाही में काफी राहत मिली। हालांकि यह राहत लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी। वर्ष 2007 में एक भारी वाहन के गुजरने से यह पुल बीचो-बीच से टूट गया।
इससे भरसारे-अलीपुर संपर्क मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया। पुल टूटने से पलिया, पतीपुर, रुदौली, बेलसौना, भगवानपुर, परसीपुर, माधवपुर, कन्हईपुर, बोखारेपुर, हरीपुर, बाबूगंज, अमारी, हड़हा समेत कई गांव के लोगों के सामने आवाजाही की समस्या खड़ी हो गई।
ग्रामीणों ने समस्या के निस्तारण की उम्मीद में अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के दरवाजे पर दस्तक दी लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। उसके बाद ग्रामीण एक बार फिर समस्या निस्तारण के लिए खुद सामने आए।
ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से क्षतिग्रस्त पुल से आगे 15 फिट गहरी ड्रेन के ऊपर लकड़ी का एक अस्थाई पुल बना दिया। टूटा हुआ पुल जहां करीब नौ फिट चौड़ा था वहीं लकड़ी के पुल की चौड़ाई करीब चार फिट है। वर्ष 2007 से अब तक 12 साल का लंबा वक्त बीत चुका है।
स्थानीय ग्रामीणों के बीच पहुंचे जन प्रतिनिधियों ने पक्के पुल का वादा भी किया लेकिन समय के साथ उसे भूल गए। आज भी क्षेत्र के बड़े, बुजुर्ग, युवा, छात्र-छात्राएं, महिलाएं जान जोखिम में डालकर इस लकड़ी के पुल से रोज गुजरते हैं।