सुल्तानपुर। शहर में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे का समुचित निस्तारण नहीं हो पा रहा है। शहर से सटे पयागीपुर इलाके में स्थित ट्रांसपोर्ट नगर में नगर पालिका की ओर से करीब 31 लाख की लागत से निर्मित एमआरएफ सेंटर (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर) शोपीस बनकर रह गया है।
इसका संचालन नहीं होने से शहर से प्रतिदिन निकलने वाले करीब 27.50 टन कचरे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
शहर में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए नगर पालिका की ओर सेे पिछले वर्ष ही ट्रांसपोर्ट नगर के पास करीब 31 लाख की लागत से स्वच्छता मिशन के अंतर्गत एमआरएफ सेंटर (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर) का निर्माण कराया गया है।
सेंटर में एक हॉल का निर्माण किया गया है। वहां स्टाफ के बैठने की व्यवस्था की गई। नगर पालिका की कार्ययोजना के अनुसार शहर से प्रतिदिन यहां पर कचरा एकत्र करके लाया जाना था। सूखे व गीले कचरे को सफाई कर्मियों के माध्यम से अलग किया जाना था।
गीले कचरे के निस्तारण के लिए दो गड्ढे बनाए गए हैं। इसमें गीले कचरे को डालकर उससे कंपोस्ट तैयार किये जाने की योजना थी। सूखे कचरे में शामिल बोतल, प्लास्टिक व अन्य पदार्थों को अलग करके उसे बेचा जाना था। एमआरएफ सेंटर का निर्माण हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है।
निर्माण के बाद से यह शोपीस बनकर रह गया है। इससे प्रतिदिन शहर से निकलने वाला करीब 27.50 टन कचरा सौरमऊ के पास बने डंपिंग ग्राउंड में फेंका जा रहा है। खुले में शहर का कचरा फेंके जाने से प्रदूषण के साथ-साथ संक्रमण फैलने का खतरा बना है।
स्थानीय निवासी व किसान नेता रूपेश शुक्ल ने बताया कि खुले में कचरा फेंके जाने से आस-पास के लोगों को काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने नगर पालिका प्रशासन की ओर से एमआरएफ सेंटर का संचालन कराए जाने की मांग की है।
इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष के पति अजय जायसवाल ने बताया कि एमआरएफ सेंटर के संचालन के लिए सफाई कर्मियों की व्यवस्था की जानी है। होली के बाद सारी व्यवस्था पूरी होने की उम्मीद है। उसके बाद एमआरएफ सेंटर का संचालन शुरू करवा दिया जाएगा।