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काल के गाल में समा गए बेसिक शिक्षा विभाग के 26 शिक्षक व कर्मी

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सुल्तानपुर। कोरोना की वजह से बेसिक शिक्षा विभाग के 26 शिक्षक व कर्मचारी काल के गाल में समा गए। इनमें बल्दीराय खंड शिक्षा अधिकारी भी शामिल हैं।
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इनमें से कुछ लोगों को चुनाव के प्रशिक्षण एवं चुनाव ड्यूटी में कोविड की समस्या हुई थी। प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उच्चाधिकारियों को इसकी विस्तृत सूचना भेजी है।
कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने कई लोगों की जान ले ली है। इस जानलेवा बीमारी से बेसिक शिक्षा विभाग के कई कर्मी काल का शिकार हो गए हैं। करीब एक माह के दौरान 26 शिक्षकों, शिक्षामित्रों व कर्मचारियों की जान चली गई है।
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मरने वालों में बल्दीराय खंड शिक्षा अधिकारी सरताज अहमद, 19 शिक्षक, चार शिक्षामित्र, सहायता प्राप्त विद्यालय का एक लिपिक व एक अनुचर शामिल हैं। बल्दीराय विकास खंड क्षेत्र के शिक्षक शैलेंद्र कुमार यादव और रमेश कुमार यादव का निधन हो गया था।
दोनों की ड्यूटी निर्वाचन में लगी थी। पीपी कमैचा विकास खंड के शिक्षक रामचंद्र सरोज और शिक्षामित्र दिनेश पांडेय भी इसी महामारी में मौत का शिकार हो गए।
दूबेपुर विकास खंड क्षेत्र के उतुरी उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत सुरेश कुमार तिवारी की पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान तबीयत खराब होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया।
शिक्षिका फरीदा सिद्दीकी, बिलकिस बानो, उमेश चंद्र यादव, सुनील पांडेय, रागिनी मिश्रा, रामचंद्र यादव समेत कई लोग कोविड का शिकार हुए हैं।
परिवारीजनों को मिले एक करोड़ की सहायता
कोरोना के इस दौर में पंचायत चुनाव ड्यूटी में संक्रमित होकर जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि मिलनी चाहिए। प्रदेश संगठन इस विषय में लगातार प्रयासरत है। हमारी मांग है कि कोविड की वजह से जान गंवाने वाले शिक्षकों को एक करोड़ रुपये सहायता राशि व एक मृतक आश्रित को नौकरी दी जाए।
- दिलीप पांडेय, जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ
टूट गई बूढ़े मां-बाप की लाठी
कोविड की वजह से मौत का शिकार हुए शिक्षकों के परिवारीजन इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। सुरेश चंद्र त्रिपाठी दूबेपुर विकास खंड क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय उतुरी में कार्यरत थे।
चुनाव ड्यूटी के दौरान उनकी मृत्यु के बाद मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा खत्म हो गया। वहीं पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटे के समक्ष पढ़ाई-लिखाई के साथ ही जीवन यापन का संकट उत्पन्न हो गया है। परिवार में और कोई आय का साधन भी नहीं है। अभी तक परिवार को विभाग से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई है।
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आर्थिक संकट से जूझ रहा शैलेंद्र का परिवार
बल्दीराय क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय जोधी में कार्यरत शैलेंद्र यादव की सेवा दो साल पहले शुरू हुई थी। चुनाव ड्यूटी के दौरान शैलेंद्र संक्रमित हो गए थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घर में बूढ़ी मां, पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा है। परिवार के जीवन यापन का अन्य कोई सहारा नहीं था। आय का एकमात्र साधन शैलेंद्र की नौकरी ही थी।
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