बजट की कमी ने बिगाड़ी पंत स्टेडियम की सूरत
शहर का इकलौता स्टेडियम उपेक्षित
प्ले ग्रांउड व कोर्ट की जर्जर हालत से खिलाड़ी परेशान
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अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर। बजट के अभाव में शहर के पंत स्पोर्ट्स स्टेडियम की तस्वीर बिगड़ गई है। न स्टेडियम का प्ले ग्राउंड दुरुस्त है और न ही बैडमिंटन कोर्ट। बैडमिंटन कोर्ट की जर्जर छत बारिश के दौरान टपकती है। स्वीमिंग पूल की बाउंड्रीवॉल क्षतिग्रस्त है। स्टेडियम परिसर में सिंचाई कॉलोनी का गंदा पानी जा रहा है। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला ने पंत स्पोर्ट्स स्टेडियम सहित जिले में खेल संसाधनों का जायजा लिया तो सबकुछ अव्यवस्थित नजर आया।
शहर के इकलौते स्टेडियम में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए आने वाले खिलाड़ियों को खेल की बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। स्टेडियम ग्राउंड में स्थित पुरानी व्यायामशाला का जर्जर भवन काफी स्थान घेरे हुए हैं। इसे निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद इसे तोड़ा नहीं गया है। ऐसे में विभिन्न खेलों के अभ्यास के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है। बैडमिंटन हॉल की छतें जर्जर हो चुकी हैं। बरसात में बैडमिंटन कोर्ट पर पानी भर जाता है। स्टेडियम परिसर से सटी सिंचाई विभाग कॉलोनी की दीवार से गंदे पानी का रिसाव होता है। इससे बैडमिंटन कोर्ट के बाहर जलभराव है। हैंडबॉल के प्रशिक्षक रह चुके प्रवीन मिश्र का कहना है कि स्टेडियम की दशा में सुधार के लिए अलग से बजट निर्धारण होना चाहिए।
कई खेलों के प्रशिक्षक नहीं
मौजूदा समय में क्रिकेट, हैंडबॉल, ताइक्वांडो, कुश्ती, टेबल टेनिस, हॉकी के प्रशिक्षक मौजूद हैं। फुटबॉल, वालीबॉल, बैडमिंटन, एथलेटिक्स के प्रशिक्षक नहीं हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। खेल विभाग के अधिकारियों की मानें तो वालीबॉल की कोच पूजा सिंह को तैनाती दी गई है, लेकिन उन्होंने अभी तक जॉइन नहीं किया है।
स्कूल-कॉलेजों के खेल मैदान बदहाल
स्कूल-कॉलेजों के खेल मैदान बदहाल हैं। राजकीय इंटर कॉलेज के खेल मैदान में निर्माणाधीन फ्लाईओवर का मलबा पड़ा है। साथ ही मैदान के दूसरे कोने पर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय एवं पुस्तकालय निर्माणाधीन हैं। मैदान में गंदगी का अंबार लगा है। जिला विद्यालय निरीक्षक गिरीश कुमार सिंह ने बताया कि खेल मैदानों की व्यवस्था के लिए समय-समय पर प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया जाता है। कक्षा नौ से 12 तक प्रतिवर्ष 60 रुपये क्रीड़ा शुल्क लिया जाता है। इसी में उपकरण, जनपदीय व मंडलीय रैली तथा डीआईओएस कार्यालय का अंशदान शामिल होता है।
बालिकाओं को मिले बेहतर सुविधा
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मेरा मानना है कि खिलाड़ी को गुरु के मार्गदर्शन की विशेष जरूरत होती है। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा देने के लिए गांव स्तर पर भी व्यवस्था होनी चाहिए। ग्रामीण अंचल में भी प्रतिभाएं छिपी होती हैं। सही मार्गदर्शन के अभाव में वे आगे नहीं बढ़ पाती। खास तौर पर बालिका खिलाड़ियों के लिए कई समस्याएं हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सुविधाओं में इजाफा करना चाहिए।
- साम्या शाह, 2016, जूनियर नेशनल हैंडबॉल खिलाड़ी
खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने की जरूरत
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खेल दिवस पर तमाम तरह की औपचारिकताएं पूरी करना दिखावे की तरह है। अमल तब होगा जब सच में खिलाड़ियों के उत्थान की बात सोची जाए। कहने के लिए खिलाड़ियों को छात्रावास की सुविधा दी जाती है। यहां पर भी अव्यवस्थाओं की भरमार रहती है। कभी भी कोई अधिकारी व जनप्रतिनिधि स्वयं खिलाड़ियों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी लेने नहीं जाता है।
- कृष्ण कुमार सिंह, 2013, जूनियर नेशनल हैंडबाल खिलाड़ी
स्टेडियम की दशा में सुधार का प्रयास
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जिले में प्रतिभावान खिलाड़ियों की कमी नहीं है। खेल बजट के हिसाब से मेजर ध्यानचंद के जन्म दिन पर प्रतियोगिता कराई जाती है। अलग से विभाग को कोई बजट अभी नहीं मिल सका है। जिला योजना समिति की ओर से स्टेडियम की दशा में सुधार के लिए बजट नहीं आवंटित किया गया। इसके लिए उच्चाधिकारियों से वार्ता करते हुए समस्या का शीघ्र निराकरण कराने का प्रयास जारी है।
-शीला भट्टाचार्य, जिला क्रीड़ा अधिकारी