सुल्तानपुर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद से जुड़े विद्यालयों में अध्ययनरत जिले के इंटरमीडिएट के 1682 छात्र बिना परीक्षा दिए ही पास हो जाएंगे। केंद्र सरकार के इस निर्णय से कुछ छात्र-छात्राएं खुश हैं तो कुछ में मायूसी छाई है।
कोरोना की वजह से पूरे सत्र पढ़ाई व्यवस्था बेपटरी रही है। ऑनलाइन क्लास के भरोसे जैसे-तैसे शिक्षण व्यवस्था चलाई गई है। यही नहीं कुछ दिनों तक ऑनलाइन क्लास पर भी बैन लगा दिया गया था। कोरोना संक्रमण को देखते हुए अभिभावक भी अपने पाल्यों को लेकर चिंतित थे। परीक्षा रद होने से अभिभावकों ने भी राहत की सांस ली है।
सीबीएसई कोऑर्डिनेटर शेषमणि मिश्र ने बताया कि जिले के सीबीएसई के विद्यालयों में लगभग 1682 इंटरमीडिएट के छात्र पंजीकृत हैं। केंद्र सरकार ने परीक्षा रद करने का निर्णय लिया है लेकिन रिजल्ट किस आधार पर घोषित होगा, इसकी कोई गाइडलाइन अभी तक नहीं आई है।
सेंट जेवियर्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में इंटरमीडिएट की छात्रा डोरा पाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने परीक्षाएं रद करने का निर्णय लेकर सराहनीय कार्य किया है। कोरोना के इस काल में सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। स्वप्निल उपाध्याय ने कहा कि कोविड-19 की वजह से पढ़ाई का तारतम्य टूट गया था। परीक्षा रद किया जाना अच्छा निर्णय है। 12वीं के छात्र जीशान अख्तर भी सीबीएसई की परीक्षा रद किए जाने से संतुष्ट हैं।
सीबीएसई की इंटरमीडिएट परीक्षा रद हो जाने के बाद अब यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की परीक्षा पर भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं। विभाग से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि परीक्षा जुलाई में हुई तो यूपी बोर्ड के परीक्षार्थी तमाम संस्थानों में सीबीएसई के बच्चों से पिछड़ जाएंगे।
शासन को इसका अंदेशा है। इसीलिए यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की परीक्षा रद होने के पूरे आसार हैं। वहीं शासन की ओर से 11वीं की वार्षिक व अर्धवार्षिक परीक्षा का अंक वेबसाइट पर अपलोड कराए जाने से इस आशंका को और भी बल मिलता है।
जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष डॉ. राधेश्याम सिंह ने बताया कि अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में शिक्षण सत्र 2021-22 से नवीन शिक्षा नीति लागू होगी। विश्वविद्यालय के कुलपति ने 10 सदस्यीय जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया है। इंटरमीडिएट के रिजल्ट घोषित होने के बाद प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी।