स्वयं सहायता समूह के माध्यम से होगा पौधरोपण
गौरीगंज (अमेठी)। शासन जल्द ही जिले के सभी ब्लॉकों में पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों को स्वस्थ रखने में कारगर सहजन के पौधों का रोपण कराएगा। यह काम जिले में संचालित 4,690 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 51,590 महिलाओं के माध्यम से पूरा किया जाएगा।
शासन ने महिलाओं को सहजन के पौधे निशुल्क (बाजार में कीमत सात रुपये) उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी वन विभाग को दी है। पर्यावरण संरक्षण व लोगों को स्वस्थ रखने में कारगर सहजन के पौध जल्द ही जिले के तमाम घरों में भी लगे मिलेंगे।
शासन ने योजना को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी वन विभाग को दी है। इस संबंध में शासन का निर्देश मिलने के बाद आयुक्त ग्राम्य विकास ने पिछले दिनों जिले के प्रभागीय वन अधिकारी यूपी सिंह को पत्र भेजकर योजना का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा है।
आयुक्त ग्राम्य विकास की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि पौधरोपण के साथ उन्हें सुरक्षित व संरक्षित करने का काम जिले में 4,690 महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिला सदस्य करेंगी। प्रत्येक समूह में 11 महिला सदस्य हैं।
इनकी कुल संख्या 51,590 है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के साथ ब्लॉकवार बैठक करके वन विभाग इन्हें प्रति महिला सदस्य दो पौधे यानी कुल 1,03,180 उपलब्ध कराएगा। पौधरोपण का काम पूरा करने के लिए जुलाई की समय सीमा तय की गई है।
सहजन के औषधीय गुण
डीएफओ ने बताया कि सहजन के पौधे में तमाम औषधीय गुण होते हैं। सहजन की फली तीन सौ से ज्यादा रोगों में लाभकारी है। इसमें 92 तरह के मल्टी विटामिन, 46 तरह के एंटी ऑक्सीडेंट, 18 तरह की एसिड व 36 तरह के दर्द को दूर करने वाला होता है।
इसमें दूध से सत्रह गुना ज्यादा कैल्शियम, गाजर से दस गुना ज्यादा वीटा कैरोटिन, केले से तीन गुना ज्यादा पोटैशियम, संतरे से सात गुना ज्यादा विटामिन सी व पालक से 25 गुना अधिक आयरन पाया जाता है।
सहजन इन बीमारियों का तोड़
प्रति दिन सहजन का एक चम्मच चूर्ण खाने से किडनी, लीवर, हार्ट, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, कैंसर व मोटापा जैसी गंभीर बीमारी में भी लाभकारी है। सहजन के पत्तियों की बनी चाय दिल की बीमारी, डायबिटीज व गठिया रोग में रामबाण का काम करती है।