103 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी
रामचंद्र मिश्र का निधन
क्रासर
आदि गंगा गोमती के धोपाप घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
फोटो संख्या-4
अमर उजाला ब्यूरो
कादीपुर (सुल्तानपुर)। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. रामचंद्र मिश्र (103) नहीं रहे। शुक्रवार को दोपहर 12:15 बजे उन्होंने अपने पैतृक आवास पडे़ला में अंतिम सांस ली। वे पिछले एक सप्ताह से बीमार चल रहे थे। शोक संवेदना जताने वालों का पड़ेला गांव में तांता लगा रहा। आदि गंगा गोमती के धोपाप घाट पर पं. रामचंद्र मिश्र का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
वर्ष 1914 में पड़ेला गांव में बच्चा मिश्र के घर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. रामचंद्र मिश्र का जन्म हुआ था। बच्चा मिश्र के तीन बेटों राम नयन मिश्र, राजाराम मिश्र व रामचंद्र मिश्र थे। अपने तीन सगे भाइयों में वे सबसे छोटे थे। उनके बडे़ भाई राम नयन मिश्र भी स्वतंत्रता सेनानी रहे। उनका निधन वर्ष 1995 में 80 वर्ष की अवस्था में हो गया था। पं. रामचंद्र मिश्र बचपन से ही स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति समर्पित रहे। गांधी जी के आह्वान पर अपने बडे़ भाई राम नयन मिश्र के साथ आजादी की लड़ाई में कूद पडे़। अंग्रेजी सरकार ने पहली बार इन्हें 23 अक्तूबर 1940 को बस्ती जेल में निरुद्ध किया, जहां इन्हें छह माह सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। दो फरवरी 1942 को मिश्र को सुल्तानपुर जिला कारागार में बंद कर दिया गया। यहां पर भी इन्हें छह माह के सश्रम कारावास की सजा दी गई। आजादी के बाद ये ब्लॉक में बीओ के पद पर कार्यरत रहे और सेवानिवृत्त होने के बाद घर पर रहने लगे। इनके एक पुत्र व तीन पुत्रियां तथा चार पौत्र हैं। इनके पुत्र अरुण कुमार मिश्र का कुछ वर्ष पूर्व निधन हो गया है। इनके पौत्र राहुल एवं अमित मिश्र प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक व वरुण मिश्र इंजीनियर एवं तरुण मिश्र चिकित्सक के पद पर कार्यरत हैं। निधन की सूचना मिलते ही प्रशासन की तरफ से एसडीएम मोतीलाल सिंह, तहसीलदार रामचंद्र सरोज एवं कोतवाली प्रभारी केवी सिंह ने मिश्र के शव पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। क्षेत्र के संभ्रांत जनों का मिश्र के घर तांता लगा रहा। गोमती नदी के धोपाप घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इनके बड़े पौत्र राहुल मिश्र ने मुखाग्नि दी।