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बिना पॉवर स्वीकृत कर दीं सैकड़ों कार्ययोजना

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बिना अधिकार स्वीकृत
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कर दीं सैकड़ों कार्ययोजना
क्रासर
जिले के प्रभारी डीपीआरओ का कारनामा

जांच में हो सकता बड़े खेल का खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
गौरींगज। जिले के पंचायतीराज विभाग में नियम-कानून को ताक पर रखकर ऐसी सैकड़ों कार्ययोजना को मंजूरी दी गई जिन्हें स्वीकृति देने का अधिकार ही प्रभारी डीपीआरओ को नहीं था। अधिकार क्षेत्र से आगे जाकर वित्तीय कार्ययोजना को स्वीकृति देने का यह खेल बीते वित्तीय वर्ष में खेला गया। बिना पॉवर स्वीकृति देने के बहाने जिम्मेदार अधिकारियों ने लाखों का वारा-न्यारा किया।
अलग-अलग मद से ग्राम पंचायतों में होने वाले कार्य को कराने से पहले कार्ययोजना बनाने और उस पर स्वीकृति लेने का प्रावधान है। शासनादेश को आधार मानें तो राज्य वित्त, 13वां वित्त और 14वां वित्त के मद से होने वाले किसी भी कार्य में दो लाख रुपये तक की कार्ययोजना को स्वीकृत करने का पॉवर ग्राम पंचायतों के पास है। दो लाख से ढाई लाख रुपये तक की कार्ययोजना को मंजूरी देने का अधिकार ब्लॉकों में नियुक्त एडीओ पंचायत में निहित है। 2.5 लाख से पांच लाख रुपये तक की कार्ययोजना को मंजूरी देने का अधिकार डीपीआरओ (जिनके पास वित्तीय पॉवर हो) और इसके ऊपर की स्वीकृतियों का अधिकार जिलाधिकारी को है। हालांकि जिले में शासनादेश की धज्जियां उड़ाते हुए स्वीकृतियां देने में जमकर मनमानी बरती गई है। सूत्रों की मानें तो बीते वित्तीय वर्ष में (31 मार्च 2017 से पूर्व) जिले के प्रभारी डीपीआरओ उमाकांत ने सभी ब्लॉकों की सैकड़ों ग्राम पंचायतों से आई कार्ययोजना की पत्रावलियां अपने स्तर से स्वीकृत कर दीं जबकि उनके पास सिर्फ प्रशासनिक पॉवर है। डीपीआरओ का वित्तीय अधिकार डीडीओ में निहित है। बिना पॉवर स्वीकृतियां देकर जिम्मेदार अधिकारियों ने न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ाईं बल्कि लाखों का वारा-न्यारा भी किया।
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कराई जाएगी जांच : डीएम
जिलाधिकारी योगेश कुमार ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि बिना पॉवर कार्ययोजना को मंजूरी दी गई है तो यह गंभीर मामला है। जांच कर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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