फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विदेशी पक्षियों की शरणगाह समदाताल के अस्तित्व पर संकट के बादल

विज्ञापन
विज्ञापन
विदेशी पक्षियों की सैरगाह समदाताल के अस्तित्व पर संकट
विज्ञापन


अमेठी। जिले के विकास खंड अमेठी की ग्राम पंचायत नुवावां में करीब 400 बीघे में फैले समदाताल के अस्तित्व पर संकट के बादल मड़रा रहे हैं। कभी यहां आने वाले विदेशी मेहमानों का कलरव कोसों दूर तक गूंजता था।

समय के साथ धीरे धीरे यह ताल अतिक्रमण का शिकार होता गया। एक समय था जब ताल को पार करने के लिए लोगों को सोचना पड़ता था। आज उसी ताल में एक बूंद पानी तक नहीं है।
विज्ञापन


यूपीए सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा का इसी समदाताल से राहुल गांधी ने शुभारंभ किया था। जिसमें दो दर्जन से अधिक तालाब खोदे जाने के साथ ही उनका सुंदरीकरण होना था। न्यायालय के सख्त निर्देश के बावजूद स्थानीय प्रशासन की कार्य प्रणाली के कारण समदाताल अपना अस्तित्व खो रहा है।

स्थानीय तहसील के विकास खंड की ग्राम पंचायत नुवावां में करीब 400 बीघा क्षेत्रफल में समदाताल फैला था। समय बीतने के साथ ही धीरे धीरे समदाताल अतिक्रमण का शिकार होता गया।

आज स्थानीय लोग तालाब के काफी हिस्से पर कब्जाकर खेती कर रहे हैं। बुजुर्ग राजेंद्र प्रसाद, रमापति, सूर्यनारायण, हनुमान प्रसाद, अमरपाल आदि बताते हैं कि समदाताल के एक छोर पर खड़े होने के बाद दूसरा छोर दिखाई नहीं पड़ता था।

इसके चारों ओर कोसों दूर तक जंगल ही जंगल था। जिसमें जंगली जानवर रहते थे। इस ताल का पानी कभी सूखता नहीं था। कार्तिक माह से विदेशी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता था।

झुंड के झुंड हजारों की संख्या में विदेशी मेहमान यहां आकर डेरा डालते थे। चार माह के प्रवास के बाद फाल्गुन माह से विदेशी पक्षियों का प्रस्थान शुरू हो जाता था। कोसों दूर तक इन विदेशी पक्षियों का कलरव सुनाई देता था।

पक्षियों का झुंड जब आसमान में उड़ता था तो इनके उड़ने से किसी तेज तूफान की आहट जैसे प्रतीत होती थी। कुछ पल के लिए अंधेरा छा जाता था। अब समदाताल का अस्तित्व खतरे में जानकर विदेशी पक्षी भी नहीं दिखाई पड़ते।

समदाताल स्थानीय सांसद व कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का ड्रीम प्रोजेक्ट था। राहुल गांधी ने समदाताल के 41.2 हेक्टेयर भूभाग पर एक साथ करीब दो दर्जन से अधिक तालाबों की खुदाई के कार्य का शुभारंभ करते हुए यूपीए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा का शुभारंभ यहीं से किया था।

इस परियोजना के तहत समदाताल को पर्यटन स्थल बनाने की भी योजना थी। इसके तहत कुछ तालाबों की खुदाई हुई लेकिन धीरे धीरे समय के साथ अब तालाब समतल होकर मैदान का रूप ले लिया है।

आसपास के गांवों के लोग तालाब की काफी भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर खेती कर रहे हैं। वर्ष 2017 में शिकायत पर तत्कालीन जिलाधिकारी योगेश कुमार ने समदाताल का निरीक्षण कर तालाब की भूमि की पैमाइश कराने के साथ ही बैरिकेडिंग एवं विकास विभाग से तालाबों की खुदाई व सौंदर्यीकरण कराने का निर्देश दिया था।

डीएम के निर्देश पर पैमाइश के दौरान करीब 26 बीघा अतिक्रमण की गई भूमि को खाली भी कराया गया था। कुछ समय बाद डीएम का स्थानांतरण होने पर मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया।

समदाताल की 26 बीघे भूमि पर लोगों को पट्टा दे दिया गया था। शिकायत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी योगेश कुमार ने हल्का लेखपाल से मामले की रिपोर्ट मांगी थी। हल्का लेखपाल ने करीब 26 बीघे भूमि पर पट्टा होने की रिपोर्ट दी थी लेकिन उस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विज्ञापन


अपर जिलाधिकारी वंदिता श्रीवास्तव ने कहा कि आदर्श आचार संहिता समाप्त होने के बाद विशेष अभियान चलाकर समदा ताल समेत अन्य सुरक्षित भूमि से अतिक्रमण हटवाया जाएगा। संबंधित के खिलाफ एंटी भूमाफिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें