सुल्तानपुर। केंद्र सरकार की सौभाग्य योजना में डाक विभाग की ओर से वर्ष 2018 में जनपद के राजस्व गांवों में डाककर्मियों से विद्युत कनेक्शनों के लिए सर्वे कराया गया था।
जिले में भी सहायक डाक अधीक्षक के अधीनस्थ सर्वे का सत्यापन करने वाले डाक सर्वेक्षकों को प्रति गांव के हिसाब से 50 रुपये का भुगतान करना था।
विभिन्न क्षेत्रों में चार डाक सर्वेक्षकों ने करीब 308 गांव के सर्वे का सत्यापन किया था। इन डाक सर्वेक्षकों के खाते में 15,400 रुपये के स्थान पर 1,54,000 रुपये का भुगतान कर दिया गया। भुगतान में करीब 1,38,600 रुपये का गोलमाल सामने आया है।
डाक सेवक संघ की शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि इसमें विद्युत सर्वेक्षण का दोबारा स्थलीय सत्यापन होगा।
सर्वेक्षण में संदिग्ध पाए जाने वाले ग्रामीण डाक सेवक, बीपीएम (ब्रांच पोस्ट मास्टर) व डाक सर्वेक्षकों के बयान भी दर्ज कराए जाएंगे। संदेह के घेरे में आने वाले वाले कर्मचारी यदि दोषी पाए गए तो उनसे रिकवरी भी होगी।
स्थानीय डाक अधीक्षक अनिल कुमार दुबे ने बताया कि अभिलेखों की पड़ताल लगभग पूरी हो चुकी है। जिन स्थानों पर गड़बड़ी होने की आशंका है वहां के डाक सर्वेक्षकों, बीपीएम व ग्रामीण डाक सेवकों के बयान दर्ज होंगे। इसके बाद अग्रिम कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी।
डाक निदेशक (प्रयाग) राजीव उमराव ने बताया कि विद्युत सर्वेक्षण के भुगतान में हुई लापरवाही का मामला गंभीर है। प्रत्येक गांव के सर्वे व भुगतान की जांच कराई जा रही है।
इस संबंध में डाक अधीक्षक सुल्तानपुर को स्पष्ट रिपोर्ट देने को कहा गया है। उन्होंने अभी कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया है। जांच रिपोर्ट मिलने पर निश्चित रूप से कार्रवाई होगी।