झारखंड के गढ़वा जिले से 22 महिला, पुरुष श्रमिक बच्चों को लेकर पैदल कानपुर के लिए निकल पड़े। सभी कानपुर के रहने वाले है। दो दिन पैदल चलकर राबर्ट्सगंज पहुंचे श्रमिकों का कहना है कि वे गढ़वा में गोलगप्पे बेचते थे। जितने रुपये थे, वह 42 दिन के लॉकडाउन में खत्म हो गए। अब उनके पास खाने-पीने के लिए कुछ नहीं है। इसलिए वह पैदल घर जा रहे हैं।
राबर्ट्सगंज रोडवेज बस स्टेशन के समीप फ्लाईओवर के नीचे सुबह करीब 11.30 बजे बैठे मिले अंशु कुमार, धन सिंह, वीरेंद्र कुमार, करण सिंह, राजेश कुमार, भोपाल, संगीता देवी, शांति देवी, साधना कुमारी, साधना देवी, आर्यन आदि का कहना था की वह मूल रूप से कानपुर के रहने वाले हैं। वे सब झारखंड प्रदेश के गढ़वा में गोलगप्पे बेचकर बेचते थे।
लॉकडाउन की घोषणा होने पर घर पहुंचाने की मांग की, लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। दो दिन पैदल चलकर राबर्ट्सगंज पहुंचे हैं। दोपहर दो बजे श्रमिक पैदल ही हिंदुआरी होते हुए मिर्जापुर के रास्ते कानपुर के लिए निकल पड़े। श्रमिकों के पैदल घर जाने की सूचना उपजिलाधिकारी सदर यमुनाधर चौहान को दी गई। उन्होंने बताया कि श्रमिकों को घर छोड़े जाने की व्यवस्था की जा रही है।