इलाके के बीना क्षेत्र में शुक्रवार को ग्रामीणों ने एनसीएल की जलापूर्ति लाइन का कार्य रोक कर विरोध शुरू कर दिया। सूचना के बाद पहुंचे अधिकारियों ने बातचीत के जरिये मामला शांत कराने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बन पाई। ग्रामीण मुआवजे की मांग पर अड़े रहे।
औढ़ी-शक्तिनगर फोरलेन की जद में आने से एनसीएल की जलापूर्ति लाइन को अलग किया जा रहा है। यह कार्य पीडब्ल्यूडी का ठेकेदार कर रहा है। बीना क्षेत्र के कोहरौल-कोहरौलिया मुख्य मार्ग पर हो रहे निर्माण कार्य को मुआवजा की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले भी रोका था। शुक्रवार को कार्य रोके जाने की सूचना पर जिम्मेदारों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने एनसीएल प्रबंधन पर मुआवजा नहीं देने व साल 1980-81 में अवैधानिक तरीके से जमीन कब्जा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि एनसीएल कोहरौलिया गांव की जमीन का ना मुआवजा दिया ना ही रोजगार। प्रबंधन कोहरौलिया गांव के लोगों को विस्थापित भी नहीं मानता। ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। ग्रामीणों के विरोध के सूचना पर लेखपाल प्रफुल्ल दुबे, पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता अमित सिंह मौके पर पहुंच ग्रामीणों से बातचीत कर मामला सुलझाने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुए। इस दौरान मुख्य रूप से भाजपा शक्तिनगर मंडल महामंत्री देवेंद्र गुप्ता, राधेश्याम, रामशंकर, तेज सिंह, श्याम सुंदर, आकाश, राजेंद्र गुप्ताए सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।