सूर्योपासना के महापर्व डाला छठ की रविवार से शुरुआत हो गई। शाम को व्रती महिलाओं ने सरोवरों में स्नान कर सूर्यदेव की पूजा की और चावल-लौकी सब्जी से बने प्रसाद को ग्रहण कर नहाय-खाय की रस्म निभाई।
सोमवार की शाम विधि-विधान से स्नान और छठ वेदी बनाकर गुड़ से बनी खीर का प्रसाद भगवान भास्कर को अर्पण करेंगी। इसके बाद उसे ग्रहण कर (खरना) की परंपरा निभाई जाएगी।
इसके साथ ही 36 घंटे के सबसे कठिन व्रत की शुरुआत कर दी जाएगी। छठ पूजन और इसको लेकर ठप घाटों की तैयारियों में कोई खामी न रह जाए, इसके लिए राबर्ट्सगंज स्थित नगरपालिका तालाब, बढ़ौली तालाब, मेहुड़ी नहर, चोपन स्थित सोन नदी तट, ओबरा स्थित रेणुका नदी तट, अनपरा क्षेत्र के कहुआनाला स्थित अर्जुन घाट,
अनपरा कालोनी स्थित शिव सरोवर, रेणुसागर स्थित सरोवर, शक्तिनगर स्थित चिल्काझील, बीजपुर स्थित शिव सरोवर, बीना स्थित रामजानकी सरोवर आदि जलाशय तटों पर जरूरी तैयारियां जारी रहीं।
विंढमगंज स्थित सततवाहिनी नदी तट स्थित सूर्य मंदिर और रेणुसागर में शिव सरोवर तट स्थित सूर्य मंदिर में पूजन-अर्चन की विशेष तैयारियां की गई।
मंदिर के साथ ही पूरे परिसर को झालर की रंगबिरंगी रोशनी से नहवाने का प्रबंध किया गया है। व्रतियों और उनके साथ आने वालों के लिए टेंट, दवा आदि के प्रबंध किए गए हैं। चोपन, ओबरा, विंढमगंज में भक्ति संगीत का भी आयोजन किया गया है।