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Sonebhadra News: प्रसव के बाद महिला की मौत, बच्चा सुरक्षित

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संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे उपायों के बावजूद लापरवाही गर्भवती के लिए भारी पड़ रही है। करमा थाना क्षेत्र के टिकुरिया गांव में रविवार को घर पर प्रसव के बाद प्रसूता की मौत हो गई। प्रसूता की मौत को लोग स्वास्थ्य विभाग को आड़े हाथों ले रहे हैं।
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सुरक्षित और संस्थागत प्रसव को लेकर विभाग हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। बावजूद गर्भवतियों और नवजातों की मौतों का आंकड़ा कम नहीं हो रहा। क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक करमा थाना क्षेत्र के टिकुरिया गांव निवासी 20 वर्षीय सोनी को रविवार की भोर में प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उसने घर पर ही बच्चे को जन्म दिया। पहला बच्चा होने के बाद घर में खुशी का माहौल था। दोपहर में अचानक से प्रसूता की तबीयत बिगड़ गई। उसे परिजन लेकर सीएचसी करमा पहुंचे। वहां से स्थिति गंभीर देख डॉक्टरों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। दोपहर करीब सवा एक बजे उसे जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। कुछ मिनटों के बाद ही उसे मृत घोषित कर दिया गया। चिकित्सकों ने बताया कि महिला को सीवियर एनीमिया था। उसके शरीर में खून की मात्रा बेहद कम थी। ऐसे में चिकित्सकों की निगरानी में उसके प्रसव की जरूरत थी। रक्त काफी कम होने के कारण उसकी मौत हो गई। बताया कि अगर यह प्रसव घर में न होकर अस्पताल में होता तो उसकी जान बच सकती थी। बच्चे के पैदा होने की खुशी कुछ ही घंटे में मातम में बदल गई। प्रसूता की मौत को लेकर अब स्वास्थ्य विभाग के संस्थागत प्रसव के दावों की पोल खुल गई है।
महिला ने घर पर ही बच्चे को जन्म दिया था। इस संबंध में अस्पताल आने के बाद जानकारी हुई। उसे सीवियर एनीमिया था, जिसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था। खून की कमी के कारण मौत की संभावना है। -डॉ. मुन्ना प्रसाद, अधीक्षक, सीएचसी करमा।
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