एनटीपीसी रिहंद के शिवालिक अतिथि गृह में पत्रकारों से मुखातिब समूह महाप्रबंधक एस नरेंद्र। (दाएं से तीसरे)
कोयला आपूर्ति में आने वाली दिक्कत का सामना अब नवरत्न कंपनी एनटीपीसी और मिनी रत्न कंपनी एनसीएल दोनों मिलकर करेंगे। इसके लिए संयुक्त रणनीति बनाने के साथ ही पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एनसीएल की चार कोल खदानों को लेकर काम भी शुरू हो गया है। इसमें बारिश से होने वाली दिक्कतों से निबटने की तैयारियां तो शामिल हैं ही, अन्य दिक्कतों को लेकर तकनीकी सहयोग और आपात स्थिति में मशीनरी पार्ट्स की उपलब्धता भी शामिल है।
एनटीपीसी रिहंद आवासीय परिसर स्थित शिवालिक अतिथि गृह में इस संयुक्त रणनीति से जुड़ी जानकारियां पत्रकारों से साझा करते हुए समूह महाप्रबंधक एस नरेंद्र ने बताया कि पिछले साल बारिश के दौरान कोयला आपूर्ति को लेकर काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा था। इसको देखते हुए पिछले माह एनटीपीसी रिहंद, सिंगरौली और विंध्याचल परियोजना के समूह महाप्रबंधक, ईडी ने एनसीएल के सीएमडी टीके नाग से मुलाकात की और इस पर विस्तृत चर्चा के बाद एक दूसरे से समन्वय की रणनीति बनाई गई।
केंद्रीय मुख्यालय स्तर से भी इस पर मुहर लगने के बाद, इसको लेकर काम भी शुरू कर दिया गया। बताया कि फिलहाल अमलोरी, दुधीचुआ, निगाही और जयंत परियोजना में एनटीपीसी की ऊर्जांचल स्थित तीनों परियोजनाओं और एनसीएल के बीच तकनीकी एवं अन्य सहयोग शुरू हो गया है। इस रणनीति के तहत कोल हैंडलिंग प्लांट के संचालन और कोयला खनन दोनों में एनटीपीसी एनसीएल की मदद करेगी।
प्लांट में दिक्कत की दशा में एनटीपीसी के इंजीनियर पहुंचकर मदद तो करेंगे ही, पाट्र्स को लेकर अगर कोई आपात स्थिति आती है तो एनटीपीसी उसे अपने यहां से उपलब्ध कराएगा। इसी तरह ओवरवर्डेन के बहाव को रोकने के लिए जाली और ड्रेनेज सिस्टम में जरूरत मुताबिक सहयोग का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रबंधक जनसंपर्क एवं राजभाषा मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव और धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ प्रबंधक सीएसआर शुभदीप सोम ने किया । जीएम पीके महापात्रा, एके केशरी, एजीएम आरबी पांडेय, केएस मूर्ति, नंदकिशोर आदि मौजूद रहे।