सोनभद्र। मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान धारक रोगियों के इलाज के बाद संबंधितों को भुगतान के लिए मिलने वाली धनराशि को लगभग एक साल से डंप रखने के मामले में स्टेट हेल्थ एजेंसी (सांची) की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा ने बिंदुवार जानकारी मांगी है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है, किसके स्तर से लापरवाही बरती गई, इसके बारे में पूछा गया है। उधर, मेडिकल काॅलेज में प्रभावित चल रही आयुष्मान मरीजों के ऑपरेशन को सुचारू रूप से जारी रखने की भी कवायद शुरू कर दी गई है। एक तरफ जहां देनदारियों के भुगतान की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। वहीं, बुधवार से इंप्लांट सामग्री की आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद है। इसके साथ ही बारी का इंतजार कर रहे आयुष्मान कार्डधारकों को ऑपरेशन की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। बता दे कि मंगलवार को अमर उजाला ने इससे संबंधित खबर प्रकाशित की थी। जिस पर स्टेट हेल्थ एजेंसी के अधिकारी सख्त हुई हैं
मेडिकल काॅलेज में अप्रैल से 10 मार्च तक लगभग 56 लाख रुपये खाते में डंप रखने का मामला सामने आया था। वहीं हड्डी-दांत रोगियों के लिए इंप्लांट सामग्री (रॉड, प्लेट आदि) की आपूर्ति देने वाली संस्था ने लगभग एक साल से भुगतान न होने के कारण हाथ खड़े कर लिए थे। इसके लिए एक सप्ताह से भी अधिक समय से मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान रोगियों को ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई मरीजों को जहां खुद को रेफर कराकर निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा तो कई लोग आयुष्मान से जुड़े वाराणसी के अस्पतालों में चले गए। कुछ लोग ऐसे थे जिनके पास पैसे की ज्यादा तंगी थी। इस कारण वह मेडिकल कॉलेज में ही पड़े-पड़े स्थिति में सुधार का इंतजार कर रहे थे। प्रकरण संज्ञान में आने के बाद जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि अप्रैल से भुगतान अटका पड़ा है इसके चलते संबंधित संस्था ने आपूर्ति बंद कर दी है जिससे आयुष्मान कार्डधारकों को ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
झांसे में न आएं, आयुष्मान से इलाज मुफ्त, कोई मांगे रुपये तो दें सूचना
सीएमओ डॉ. पंकज कुमार सिंह ने आयुष्मान कार्ड धारकों को किसी तरह के झांसे में न आने की अपील की है। कहा कि आयुष्मान से जुड़े सभी सरकारी-निजी चिकित्सा केंद्रों पर कार्ड धारकों को नि:शुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अगर कोई किसी से रुपये मांगता है। या मरीज को किसी तरह की दिक्कत आती है तो संबंधित मरीज या परिजन तत्काल आयुष्मान सेल से संपर्क करें। प्रत्येक केंद्र पर आरोग्य मित्र तैनात हैं, उनको जानकारी दें। साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय को भी इससे अवगत करांए।
स्टेट हेल्थ एजेंसी ने प्रकरण के बारे में जानकारी मांगी है। उसके क्रम में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को पत्र जारी किया जा रहा है। जो भी स्थिति सामने आएगी उसके अनुरूप कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।- डॉ. पंकज कुमार सिंह, सीएमओ
इंप्लांट सामग्री की आपूर्ति व्यवस्था बहाल हो गई है। अनुमोदन की प्रक्रिया लंबित रहने के कारण भुगतान नहीं हो रहा था। जो भी दिक्कतें थी, उसे दूर कर भुगतान शुरू कर दिया गया है। - धीरज श्रीवास्तव, वरिष्ठ सहायक, मेडिकल कॉलेज।