हिण्डाल्को रामलीला परिषद के कलाकारों द्वारा हिण्डाल्को रामलीला मैदान पर चौथे दिन राम राज्याभिषेक की घोषणा, राम वन गमन, राम-केवट संवाद एवं दशरथ स्वर्गवास आदि लीलाओं का मंचन किया गया। लीलाओं में चारों भाई विवाहोपरांत अयोध्या लौटते हैं और मंत्रिगणों से मंत्रणा करके राजा दशरथ श्री राम को अयोध्या की राजगद्दी सौंपने की घोषणा करते हैं।
अयोध्यावासी पूरे हर्ष-उल्लास के साथ श्री राम के राज्याभिषेक की तैयारियों में लगे होते हैं तो उधर नारद सोचते हैं कि यदि श्रीराम राज-पाट में लग गए तो राक्षसों का संहार कैसे होगा और इसके लिए मां सरस्वती की सहायता से मंथरा के मन में भरत को राजगद्दी और श्री राम को सात वर्ष के वनवास की कुबुद्धी भर देते हैं।
मंथरा रानी कैकेई के कान भरती है और कहती है कि राज दशरथ द्वारा दिए गए तीन वरदानों के एवज में भरत के लिए अयोध्या की राजगद्दी मांग ले और राम के लिए वनवास। मंथरा की बातों में आकर कैकेई राजा दशरथ को इसके लिए विवश कर देती है। श्री राम अपने पिता के वचनों का पालन करने हेतु माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ वन को प्रस्थान करते है।