मिड-डे-मील में मिलने वाले गेहूं के लिए बच्चों ने महीनों इंतजार किया और जब मिला भी तो गुणवत्ता इतनी खराब है कि उसे खाने से कतरा रहे हैं। नमी के कारण गेहूं खराब होने लगा है। घुन भी अधिक हैं। ऐसे गेहूं को जानवरों को खिला रहे हैं। मामला म्योरपुर ब्लाक के कोटा ग्राम पंचायत का है। व्यवस्था की खामियों से नाराज अभिभावक विद्यालय के अध्यापकों से नाराजगी जता रहे हैं। वहीं अध्यापक कोटेदार पर दोष मढ़ रहे हैं।
जिले के कंपोजिट विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को मिड डे मील के तहत अवकाश अवधि का चावल-गेहूं दिया जा रहा है। सितंबर-अक्तूबर में बंटने वाले गेहूं का वितरण अब हो रहा है। कंपोजिट विद्यालय कोटा में कुछ दिनों पूर्व गेहूं बांटा गया तो उसकी गुणवत्ता देख अभिभावक भड़क गए। चार माह बाद मिल रहे गेहूं में घुन अधिक हैं। नमी के कारण भी गेहूं खराब होने लगा है। अभिभावकों का कहना है कि ऐसा गेहूं तो जानवरों को ही खिलाया जा सकता है। अभिभावक सुदामा प्रसाद ने बताया कि सितंबर-अक्तूबर माह के राशन का वितरण जनवरी में कराया गया। इस कारण गेहूं खराब हो गया है। इस तरह के राशन के वितरण से ठीक होता कि राशन का वितरण ही नहीं कराते। इस बाबत म्योरपुर के बीईओ सुरेंद्र प्रसाद सहाय ने बताया कि इसकी सूचना अभी न तो विद्यालय की ओर से मिली है और न ही किसी अभिभावक ने शिकायत की है। मामले की जानकारी लेंगे। अगर बच्चों को खराब गेहूं दिया गया होगा तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।