लोकल फॉल्ट की मरम्मत को लेकर बिजली निगम के अफसर कितने संजीदा हैं, इसका प्रमाण विकास भवन में दिख रहा है। जिले में विकास का खाका खींचने वाले विकास भवन की बिजली व्यवस्था ही पिछले चार दिनों से ठप है।
केबल में आई खराबी के चलते आपूर्ति न होने से इंवर्टर-बैट्री के भी जवाब देने से सरकारी विभागों में न पंखा चल पा रहा है और न बत्ती जल रही। मंगलवार को उमस भरी गर्मी में अफसर-कर्मचारी बेहाल दिखे। जरूरी कार्यों को निपटाने के लिए कई विभागाें के कर्मचारी कम्प्यूटर का मॉनीटर व सीपीयू लेकर इधर-उधर भागते रहे।
विकास भवन में 17 से अधिक विभागों के दफ्तर हैं। सीडीओ, डीडीओ समेत अन्य विभागों के जिलास्तरीय अधिकारी यहां बैठते हैं। बताते हैं कि शनिवार को विकास भवन में आपूर्ति देने वाले मेन लाइन का केबल ब्लास्ट कर गया। इसके बाद से ही आपूर्ति ठप हो गई।
शनिवार को तो इंवर्टर-बैट्री से काम चलता रहा, लेकिन उसके डिस्चार्ज होने के बाद सोमवार को दोपहर बाद से ही एक-एक कर विभागों की बिजली गुल होने लगी।
मंगलवार को पंचायती राज, समाज कल्याण, बाल विकास, कौशल विकास, अर्थ एवं संख्या विभाग, लघु सिंचाई, पूर्व सैनिक कल्याण, सहकारिता, बचत, पशु पालन, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, दिव्यांगजन कल्याण सहित अन्य विभागों में बिजली न होने से कामकाज ठप रहे।
ज्यादातर अधिकारी कार्यालय में नहीं थे, जो मौजूद थे वह हाथों में फाइल व कागज लेकर हवा करते रहे। कर्मचारी दफ्तरों के बाहर बैठे दिखे तो कुछ कंप्यूटर सिस्टम लेकर जरुरी काम निपटाने के लिए दूसरा ठिकाना तलाशते रहे। कई विभागों के कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट और आवास के कम्प्यूटर से काम किया।
सभी में विकास भवन के जिम्मेदारों और बिजली निगम के अफसरों के प्रति गुस्सा दिखा। कर्मचारियों ने बताया कि केबल जलने की सूचना उसी दिन दे दी गई थी, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। आज जब पूरी तरह बिजली गुल हुई तब ऑर्डर शीट बनाकर भेजा गया है। जब विकास भवन का यह हाल है तो अन्य जगहों का क्या होगा।
सौर ऊर्जा संयंत्र की खुली पोल
करीब तीन साल पहले विकास भवन को कटौती मुक्त रखने के लिए छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया गया था। इससे विकास भवन के सभी महत्वपूर्ण विभागों को बिजली आपूर्ति होनी थी। कुछ विभागों को छोड़कर कहीं भी इससे आपूर्ति नहीं हो रही। बिजली व्यवस्था में खराबी के बाद इसकी सक्रियता की पोल खुल गई।