शक्तिनगर। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एनटीपीसी परिसर शक्तिनगर में बुधवार को सौ से अधिक स्वयंसेवकों ने श्रमदान किया। इसके बाद बौद्धिक परिचर्चा हुई। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शताब्दी वर्ष के तहत ये कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि भारतीय जीवन बीमा निगम शक्तिनगर के वरिष्ठ प्रबंधक पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि विद्यापीठ का अवतरण भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के गर्भ से हुआ हैं, जिसके मूल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की सोच और राष्ट्ररत्न शिवप्रसाद गुप्त का विचार है। यह कहना अतिशयोक्ति नही होगा कि काशी विद्यापीठ क्रांतिकारियों की शरण स्थलीय रही है। मुख्य वक्ता डॉ. मानिक चंद पांडेय ने कहा कि विद्यापीठ की शत वर्षीय यात्रा की विस्तार से चर्चा की। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. विनोद कुमार पांडेय ने काशी विद्यापीठ के तत्कालीन आचार्यों की सेवा, त्याग, समर्पण के भाव को उद्घाटित करते हुए विद्यापीठ को सर्वमंगल संस्था की संज्ञा दी। डॉ. अनिल कुमार दूबे ने भी विचार रखे। संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र कुमार पटेल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. छोटे लाल प्रसाद ने किया। स्वयंसेवकों की ओर से मिथिलेश, अन्नू, रजनी, उजाला, बृजेश, राजू, अंकुश सिंह, सौरभ मिश्रा, अमित कुमार, सुजित कुमार आदि की सक्रिय भूमिका रही।