अनपरा। काशीमोड़ स्थित वन विभाग के बैरियर पर ट्रांजिट परमिट लेने के चक्कर में हाईवे पर खड़े वाहनों का चालान कटने से वाहन मालिकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वन विभाग की ओर से वाहनों के लिए पार्किंग यार्ड की व्यवस्था नहीं कराने से परेशानी हो रही है।
ऊर्जांचल में कोयला खदानों से कोल परिवहन करने वाले वाहनों को इन दिनों पुलिस का चालान अभियान भारी पड़ रहा है। ट्रक एवं ट्रेलर से कोयला लेकर वाहन खदानों से निकलतें हैं तो वन विभाग से ट्रांजिट परमिट लेना पड़ता है।
वन विभाग ने इसके लिए काशीमोड़ पर अपना बैरियर बनाया है। वाहन काशीमोड़ पहुंचते हैं तो चालक हाईवे किनारे वाहन खड़ाकर ट्रांजिट परमिट लेने लगते हैं। टू लेन होने के कारण जाम लग जाता है। यातायात पुलिस जाम व दुर्घटना से बचाव के लिए वाहनों का चालान काट देती है।
चालान का यह बोझ वाहन मालिकों पर भारी पड़ने लगा है। वन विभाग ने वाहनों को खड़ा करने के लिए पार्किंग यार्ड की कोई व्यवस्था नंही है।
चालक वाहन खड़ी कर वन विभाग पर ट्रांजिट कटाने के लिए जैसे ही जाता है, तो पुलिस वहां आकर चालान काट देती है। पुलिस के चालान की भरपाई हम लोगों को अपनी जेब से करनी पड़ रही है। - मुन्ना ओझा वाहन मालिक।
वन विभाग ने ट्रांजिट कैम्प तो हाईवे किनारे बना दिया, लेकिन वाहनों को खड़ी करने के लिए यार्ड की व्यवस्था नही की। चालक मजबूरी में हाईवे किनारे वाहनों को खड़ी कर ट्रांजिट कटाने जाता है। - अखिलेश यादव वाहन मालिक।
ट्रांजिट कैम्प को सही से कोल खदानों के बैरियर पर होना चाहिए ताकि वाहन कोयला खदाने से निकलने के साथ सारे कागजात पूर्ण करके ही निकलेंगे। इससे समय की बचत होगी और सभी को सहूलियत होगी। - अजय राय वाहन मालिक।
हाईवे पर जाम और दुर्घटना का जिम्मेदार भारी वाहनों को ही ठहराया जाता है। इन समस्याओं को लेकर कई बार बैठकें हुईं, लेकिन कोई निदान नही निकाला गया। नुकसान हम वाहन स्वामियों को हो रहा है। - अशोक मौर्या वाहन मालिक।
वन विभाग की वेबसाइट से ऑनलाइन परमिट लिया जा सकता है। वर्तमान में वन विभाग का करीब 90 फीसदी ट्रांजिट ऑनलाइन ही कट रहा है। एनसीएल के बैरियर पर ट्रांजिट शुल्क काटने के लिए वन विभाग का कैंप लगाने की बात चल रही है। - भानेंद्र सिंह, डीफओ पिपरी रेंज।