हादसे के बाद शवों की पहचान कर छत्तीसगढ़ प्रशासन ने उन्हें उनके गांव भिजवाया। एक साथ तीन शव गांव पहुंचने से मातम पसर गया। परिजन बेसुध होकर बिलखते रहे, वहीं ग्रामीणों की भारी भीड़ अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ी।
इस दर्दनाक हादसे ने तीन परिवारों को उजाड़ दिया। राजू भारती की बेटी की शादी अगले महीने तय थी और घर में खुशियों की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन हादसे ने सारी खुशियां छीन लीं। उनके दो नाबालिग बेटे हैं। वहीं बृजेश भारती अपने पीछे दो पुत्र और पंकज कुमार दो बेटियां छोड़ गए हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया।
तीनों का अंतिम संस्कार कचनरवा स्थित पांडु नदी के तट पर एक साथ किया गया। जब एक साथ तीन अर्थियां उठीं, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।