अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित दूसरी सीट भी इसी जिले के दुद्धी विधानसभा की है। यह सीट भाजपा ने गठबंधन के सहयोगी अपना दल-एस को दी है। पहली बार विधायक बने संजीव सिंह गोंड को अब पार्टी ने राज्य मंत्री बनाकर विधानसभा चुनाव से पहले जिले को बड़ा तोहफा दिया है। यहां के लोग लंबे समय से मंत्री पद की मांग करते आ रहे हैं। यह बात दीगर है कि सरकार ने दूसरे विधायक के नाम पर मुहर लगाई है। राज्य मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद जिले के कार्यकर्ता खुशी से झूम उठे। उनके डाला स्थित आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
साढ़े तीन लाख आदिवासी मतदाताओं को साधने की कोशिश
जिले की चार विधानसभा क्षेत्रों में कुल साढ़े 13 लाख मतदाता हैं। इसमें ज्यादा करीब साढ़े तीन लाख मतदाता अनुसूचित जनजाति के हैं। इसमें भी गोंड, कोल, चेरो, बैगा की संख्या अधिक है। कोल बिरादरी से पकौड़ी लाल कोल अपना दल-एस से सांसद है। दुद्धी से अपना दल विधायक हरिराम चेरो जनजाति का प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा ने गोंड जनजाति को साधकर बड़े मतदाता वर्ग को अपने खेमे में करने का दांव खेला है।
अब तक इस जाति पर सपा का अच्छा प्रभाव रहा है। सपा नेता व पूर्व विजय सिंह गोंड इन्हीं वोटों की बदौलत सात बार विधायक चुने जा चुक हैं। भाजपा के रणनीतिकारों की मानें तो गोंड बिरादरी का साथ मिलने से भाजपा की स्थिति ओबरा के साथ दुद्धी में भी मजबूत होगी। चंदौली, मिर्जापुर सहित अन्य जिलों में बसी गोंड जाति पर भी अच्छा प्रभाव होगा।
ब्लॉक प्रमुख पद पर फंसी थी प्रतिष्ठा
हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में चोपन विकासखंड से विधायक संजीव सिंह गोंड की पत्नी लीला देवी प्रमुख चुनी गई है। जिले के कुल दस में से आठ ब्लॉकों में निर्विरोध निर्वाचन हुआ। सिर्फ नगवां और चोपन में ही वोट पड़े थे। चोपन में विधायक की प्रतिष्ठा दांव पर थी। पार्टी नेताओं ने यहां भी निर्विरोध निर्वाचन के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था, मगर बात नहीं बनी। हालांकि मतदान में भी लीला देवी की एकतरफा जीत हुई।
पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता रहा हूं। एक कार्यकर्ता के तौर पर ही जिम्मेदारियों का निर्वहन करता रहा हूं। सौभाग्यशाली हूं कि पार्टी ने मुझ यह जिम्मेदारी सौंपी। उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करुंगा। जनता की सेवा और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए जीजान लगा दूंगा। - संजीव गोंड , विधायक व राज्य मंत्री।
विधायक संजीव सिंह गोंड़ के मंत्री बनाए जाने से पार्टी को मजबूती मिलेगी। आदिवासी मतदाताओं के बीच पार्टी का जनाधार बढ़ेगा। जिले में पार्टी का हर कार्यकर्ता आह्लादित है। चुनाव से पहले सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। - अजीत चौबे, जिलाध्यक्ष, भाजपा।
संजीव सिंह गोंड का प्रोफाइल-
नाम: संजीव सिंह गोंड
पिता: स्व. रामनखन सिंह गोंड
मां: सविता देवी
पत्नी: लीला देवी (ब्लॉक प्रमुख चोपन)
संतान: तीन बेटे
उम्र: 46 वर्ष
शिक्षा: स्नातक
व्यवसाय: कृषि
राजनीतिक अनुभव: संघ से जुड़े रहे, वर्ष 2017 में पहली बार विधायक बने।
खबर मिलते ही लखनऊ गया परिवार
प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं कई दिनों से चल रही थी। इसमें आदिवासी चेहरे के रुप में संजीव सिंह गोंड को शामिल करने की भी अटकलें लगाई जा रही थी। इसका संकेत पहले ही मिल गया था। पार्टी की ओर से उन्हें लखनऊ में ही रुके रहने का निर्देश दिया गया था। दोपहर तक उनके नाम को लेकर अटकलबाजियां जारी थी। खुद विधायक संजीव सिंह गोंड इससे बेखबर थे। हालांकि उनकी मुस्कान से जाहिर हो रहा था कि पार्टी से संकेत मिल चुका है। दोपहर बाद नाम की पुष्टि होते ही उनके डाला स्थित आवास से परिवार के लोग लखनऊ के लिए रवाना हो गए। जिले से बड़ी संख्या में समर्थक लखनऊ गए। लिहाजा शाम को मंत्री पद की शपथ लेने के दौरान आवास पर सन्नाटा पसरा रहा।