गर्मी में प्रदेश को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए अनपरा तापीय परियोजना ने कमर कस ली है। सभी इकाइयों का वार्षिक अनुरक्षण पूरा कर लिया गया है। अनपरा परियोजना में कोयले का भी भरपूर स्टॉक है। अभी 9 लाख 40 हजार टन कोयला उपलब्ध है, जो मानक का 150 प्रतिशत है।
मार्च में कोयले ढुलाई के लिए 40 वैगन भी आ रहे हैं। गत वर्ष प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग ने सभी रिकाॅर्ड तोड़ दिए थे। करीब 30600 मेगावाट की मांग दर्ज की गई थी। इस वर्ष मांग और बढ़ने की उम्मीद है।
उत्पादन निगम की 2630 मेगावाट की अनपरा तापीय परियोजना प्रदेश को सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध कराती है। पिछले वर्ष भी बिजली की अप्रत्याशित मांग के बीच अनपरा तापीय परियोजना ने निर्बाध आपूर्ति की थी। इस वर्ष भी परियोजना ने पूरी तैयारी कर ली है।
इसके लिए सभी इकाइयों का वार्षिक अनुरक्षण पूरा कर लिया गया है, ताकि बिजली की पीक डिमांड में आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा न उत्पन्न हो। परियोजना ने कोयले का स्टॉक भी मानक से 150 प्रतिशत अधिक यानी 9 लाख 40 हजार टन कर लिया है।
बिजली की मांग 20 हजार मेगावाट के करीब होने के कारण अभी प्रतिदिन कोयले की खपत 31.2 हजार टन है। पीक डिमांड के समय कोयले की खपत 45 हजार टन चला जाता है।
20 मार्च तक आ जाएंगे 40 वैगन
अनपरा तापीय परियोजना के पास वर्तमान में 10 लोको और 137 वैगन हैं। इससे 4 रैक तैयार कर एनसीएल की खदानों से इन्हीं के माध्यम से कोयला ढुलाई कराया जा रहा है। अभी प्रतिदिन 31.2 हजार टन कोयला प्रतिदिन की खपत है, जबकि प्रतिदिन 23.6 हजार टन कोयला प्राप्त हो रहा है। कोयला की आपूर्ति के लिए परियोजना की 4 रैक के साथ रेलवे के 4 रैक का सहारा लिया जा रहा है। रैक कम होने से खपत के अनुसार कोयला उपलब्ध नहीं हो रहा है। कोयले की उपलब्धता बनाए रखने के लिए प्रबंधन ने 40 नए वैगन आर्डर देकर मंगा लिए हैं। 20 मार्च तक सभी वैगन परियोजना में आ जाएंगे।
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सभी इकाइयों का वार्षिक अनुरक्षण पूर्ण कर लिया गया है। कोयले का भी पर्याप्त स्टॉक है। कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए 40 नए वैगन 20 मार्च तक आ जाएंगे। इससे परियोजना में कोयला आपूर्ति में तेजी आएगी। - इं. जेपी कटियार, मुख्य महाप्रबंधक अनपरा तापीय परियोजना।