इसी तरह हरिहर प्रसाद भी 50 वर्षों से शूर्पणखा, ताड़का की भूमिका निभाते रहे हैं। नीरज अग्रहरि ने इंद्र, बाणासुर, बाली तो धनौरा के मनोज पांडेय 14 वर्षों तक राम का अभिनय करते रहे हैं। वहीं पवन सिंह 15 वर्षों से लगातार रावण का किरदार निभा रहे हैं। ईश्वरीय मिश्रा 60 वर्षों से वशिष्ठ, विश्वामित्र जैसे किरदारों में रहते हैं। इस बार रामलीला 14 अक्तूबर को मुकूट पूजा के साथ आरंभ होगी।
यूपी-एमपी के सीमावर्ती क्षेत्र में सिंगरौली स्टेट का प्रभाव रहा है। वहीं के राजा ने काशी की तर्ज पर यहां रामलीला की शुरुआत कराई थी। सिंगरौली में मुकूट पूजा के साथ रामलीला आरंभ होती थी। रिहंद बांध के निर्माण के दौरान सिंगरौली स्टेट डूब क्षेत्र में समा गया। इसके बाद रामलीला भी दुद्धी नगर में पहुंच गई।
ज्यादातर कलाकार दुद्धी के ही थे, लिहाजा उन्होंने अपने नगर में रामलीला शुरू किया, जो आज भी जारी है। देवेंद्र मिश्र बताते हैं कि कलाकाराें की प्रतिभा को देखते हुए सिंगरौली स्टेट के राजा ने रामलीला के लिए मुकूट प्रदान किया था। आज भी यह मुकूट मौजूद है, लेकिन अब इसे कोई पहन नहीं पाता। इसका वजन काफी ज्यादा है।
रामलीला कमेटी के मैनेजर कमलेश कमल के मुताबिक बीच में कई बार ऐसी स्थिति भी बनी कि लीला मंचन के लिए बाहर की मंडली को बुलाना पड़ा, लेकिन उनका अभिनय दर्शकों को रास ही नहीं आया। नतीजा मंडली के साथ स्थानीय कलाकाराें ने लगकर रामलीला को पूरा कराया। धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर, नक्कटैया, लक्ष्मण शक्ति और राज्याभिषेक के दिन भीड़ उमड़ती है।