घोरावल। उभ्भा कांड की बरसी के दिन उभ्भा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। गांव के चारों तरफ तीन किमी के दायरे में गांव को पूरी तरह सील कर दिया गया और चप्पे चप्पे पर पुलिस व पीएसी के जवान तैनात रहे। घोरावल नगर से लेकर फुलवारी, घुवास कालोनी, कन्हारी मोड़, मूर्तियां, सपही, मिर्जापुर बॉर्डर समेत तमाम जगहों पर पुलिस की सख्त नाकेबंदी रही और किसी भी बाहरी व्यक्ति को गांव में घुसने नहीं दिया गया। वहीं गांव में पूरे दिन जिले एवं तहसील के आला अफसरों समेत खुफिया एजेंसियों के लोग डटे रहे।
उभ्भा गांव में गांव में एक वर्ष पहले 17 जुलाई 2019 को जमीनी विवाद में हुए खूनी संघर्ष में जमकर असलहे, लाठी डंडे चले थे, जिसमें गोंड़ समुदाय के 4 महिलाओं समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 28 लोग घायल हुए थे। इस संबंध में गांव के ग्राम प्रधान यज्ञदत्त, गणेश, धर्मेंद्र, नीरज, अशर्फी समेत 28 लोगों पर नामजद और 50 अज्ञात लोगों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस केस में 70 आरोपी अभी भी जेल में बंद हैं और केस चल रहा है। शुक्रवार को मृतकों की बरशी मनाए जाने के मद्देनजर प्रशासन पहले से ही सतर्क था। पिछले 10 दिनों से उभ्भा गांव मिनी तहसील मुख्यालय में बदल गया। एसडीएम जैनेंद्र सिंह, सीओ राम आशीष यादव, घोरावल एसएचओ बृजेश सिंह और खुफिया एजेंसियों के लोग दस दिन से लगातार उभ्भा गांव में डेरा डाले हुए हैं। उभ्भा कांड के घटनास्थल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष के आवास के पास, मृतकों के घरों के पास समेत तमाम महत्वपूर्ण स्थानों पर मुस्तैदी के साथ फोर्स किसी भी हालात से निपटने के लिए लगी रही। शुक्रवार को मृतक 11 आदिवासियों की बरशी के दिन प्रशासन की सख्ती से पूरे उभ्भा गांव में सन्नाटा पसरा रहा। खेती बाड़ी का मौसम होने के बावजूद ग्रामीण अपने खेतों पर नही गए और दिन भर अपने घरों में रहकर अपना काम करते रहे। आदिवासियों की तरफ से बरशी मनाने की कोई सुगबुगाहट नही देखी गई।